बुलंद सोच, झाबुआ।

झाबुआ के कल्याणपुरा स्थित पूनय माता की डुंगरी पर शनिवार को शासकीय पट्टे की जमीन को लेकर दो पक्षों में खूनी संघर्ष और पथराव की घटना हुई थी। इस जमीन पर मुख्यमंत्री भू-आवासीय अधिकार योजना के तहत वर्ष 2022-23 में लगभग 302 ग्रामीणों को पट्टे जारी किए गए थे, जिनमें सभी वर्ग के लोग शामिल हैं। गणेशोत्सव के दौरान मूर्ति स्थापना और दस दिन के धार्मिक आयोजन के बाद यहां कथित कब्जे के प्रयास, मारपीट और पत्थरबाजी हुई थी, जिससे गांव में भारी तनाव फैल गया था। इसके बाद प्रभावित पट्टाधारकों ने डीजीपी भोपाल, आईजी इंदौर, एसपी और कलेक्टर झाबुआ को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की थी, तथा एडीएम को भी दो घंटे का ज्ञापन सौंपा था।
कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन और बैरिकेड हटाए
बुधवार को इसी मामले को लेकर सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार और विलेश खराड़ी के नेतृत्व में आदिवासी समाज के लोगों और संगठनों ने झाबुआ में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी आंबेडकर गार्डन पर एकत्रित होकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। इस दौरान स्थिति तब गरमा गई जब विधायक और ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट परिसर में रखे सुरक्षा बैरिकेड्स को धक्के मारकर हटा दिया। इस धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी के बीच एसडीओपी कमलेश शर्मा के हाथ और पैर में चोट लग गई। इसके अतिरिक्त एक अन्य अधिकारी सहित पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं। इस दौरान कलेक्टर के गेट अंदर से बंद कर दिए गए थे, जिससे कर्मचारियों को बाहर निकलने में परेशानी हुई।
कलेक्टर की अनुपस्थिति पर बहस
कलेक्टर डॉ. योगेश भरसट के मुख्यालय पर मौजूद न होने पर विधायक कमलेश्वर डोडियार की एसडीएम महेश मंडलोई से तीखी बहस हुई। विधायक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कलेक्टर के ठिकाने नहीं हैं, जनसुनवाई मंगलवार को रहती है और बुधवार को भ्रमण का शेड्यूल है। उन्होंने कहा कि “मैं विधायक हूं, भाई मेरे पावर बनती है, तुम क्या करते हो चेक करने की।” जवाब में एसडीएम ने कहा कि बुधवार को ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रमण होता है और कलेक्टर अभी फील्ड में हैं, जिस पर विधायक ने आदेश की कॉपी मांग ली।
प्रदर्शन का समापन और आंदोलनकारियों का पक्ष
अंत में उग्र प्रदर्शन के बाद विधायक ने एडीएम सीएस सोलंकी को ज्ञापन सौंपा और इसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ। उधर, आंदोलनकारियों का कहना है कि उन्हें परिसर में अधिकारियों से मिलने जाने के पहले रोक दिया गया था और बैरिकेड्स लगा दिए गए थे। उन्होंने कहा कि वे धूप में ही बैठे रहे और जब कलेक्टर या एसपी नहीं आए तो उन्होंने बैरिकेड्स हटाकर आगे बढ़ने का फैसला किया। आंदोलनकारियों ने यह भी कहा कि यदि बड़े अधिकारी आ जाते तो वे बैरिकेड्स हटाकर आगे नहीं जाते।

