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2026-10-17

मध्य प्रदेश में पांच फर्जी IAS-IPS अधिकारी बेनकाब, लाखों की ठगी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश में हाल के दिनों में उच्च पदों का दुरुपयोग कर ठगी के कई मामले सामने आए हैं। इन मामलों में फर्जी आईएएस और आईपीएस अधिकारी बनकर आम लोगों, पुलिस, प्रशासन और फाइव-स्टार होटलों तक को निशाना बनाया गया है। ऐसे पांच हाई-प्रोफाइल मामलों का खुलासा हुआ है, जिनमें करोड़ों रुपये की ठगी की गई।

फर्जी आईएएस तृप्ति सिंह राजपूत

सिवनी, बालाघाट और अशोकनगर के बेरोजगार युवाओं व कारोबारियों को लाखों की ठगी का शिकार बनाने वाली तृप्ति सिंह राजपूत खुद को आईएएस अफसर और मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (MPSTDC) में एडिशनल डायरेक्टर बताती थी। उस पर भोपाल और अशोकनगर में चार एफआईआर दर्ज की गई हैं। तृप्ति ‘भारत सरकार’ की नेमप्लेट लगी लग्जरी इनोवा कार का इस्तेमाल करती थी और सरकारी नौकरी का झांसा देकर युवाओं से लाखों रुपये ठगती थी। पुलिस छापे में उसके घर से महंगे आईफोन, बड़े होटलों के बिल, फ्लाइट टिकट और फर्जी दस्तावेज बरामद हुए, जिनका उपयोग वह लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए करती थी।

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आठवीं पास विकास गौतम बना 'आईपीएस'

ग्वालियर निवासी आठवीं पास विकास गौतम, जो दिल्ली के मुखर्जी नगर में चाय बेचता था, ने खुद को 2020 बैच का आईपीएस अधिकारी बताया। उसने इंस्टाग्राम पर @Vikashyadav_ips आईडी बनाकर चयनित अभ्यर्थियों की सूची पोस्ट की, जिससे उसके करीब 20 हजार फॉलोअर्स हो गए। विकास ने एक महिला डॉक्टर से ट्रेनी आईपीएस बनकर दोस्ती की और मां के इलाज के नाम पर 25 हजार रुपये ठग लिए। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने उसके ग्वालियर स्थित घर पर छापेमारी कर उसे गिरफ्तार किया, जिससे 14 लाख रुपये से अधिक की ठगी का पर्दाफाश हुआ, जिसमें दिल्ली/एमपी की लेडी डॉक्टर और सोशल मीडिया के 50 से अधिक लोग शिकार हुए थे।

गलत स्पेलिंग से खुला फर्जी आईपीएस ऋषि कुमार यादव का राज

झांसी निवासी एम.टेक पासआउट ऋषि कुमार यादव ने खुद को 2016 बैच का आईपीएस अफसर और इनकम टैक्स में असिस्टेंट इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बताया। उसने भोपाल के एमपी नगर में यूपीएससी की तैयारी कर रहे छह छात्रों को इनकम टैक्स विभाग में नौकरी का झांसा देकर उनसे एक-एक लाख रुपये मांगे। आरोपी ने अपनी पत्नी को भी दिल्ली के आबकारी विभाग का आईपीएस बताया। ऋषि ने पुराने आईडी कार्ड को एडिट कर फर्जी आईडी और जॉइनिंग लेटर बनाए, जिनमें कई स्पेलिंग की गलतियां थीं। छात्रों ने सतर्कता दिखाते हुए शिकायत की, जिसके बाद एमपी नगर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

'कलेक्टर साहब' हिमांशु पांचाल का फर्जीवाड़ा

गुजरात के अहमदाबाद निवासी हिमांशु पांचाल, जो पहले भी नकली थानेदार बनकर अवैध वसूली के आरोप में पकड़ा जा चुका है, इंदौर आया और ओमेक्स सिटी में 15 हजार रुपये महीने के किराए के मकान में रहा। उसने मकान के बाहर ‘आईएएस राज सोनी, जिला कलेक्टर’ की नेमप्लेट लगाई और 2,500 रुपये प्रतिदिन के किराए पर कार व ड्राइवर रखे। हिमांशु ड्राइवरों को स्थायी सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देता था। उसने बायपास स्थित एक सितारा होटल में ड्राइवरों के परिवार के लिए पार्टी रखी, जिसका 16 हजार रुपये का बिल बनने पर उसने रजिस्टर में ‘आईएएस राज सोनी’ लिखकर रिव्यू दिया और कहा कि उसका पीए बिल चुका देगा। होटल प्रबंधन को शक होने पर लसूड़िया पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को उसके किराए के कमरे में छत पर रुई लगाकर बादलों जैसा सजावट, आरजीबी लाइट्स और ‘आईएएस’ लिखी तस्वीरें मिलीं।

'जॉइंट सेक्रेटरी' अतुल कुमार की गिरफ्तारी

नई दिल्ली के द्वारकापुरी निवासी अतुल कुमार ने खुद को भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय में संयुक्त सचिव (जॉइंट सेक्रेटरी) बताकर उज्जैन सर्किट हाउस में बिना उचित दस्तावेज के दो कमरे बुक कराए। उसने उज्जैन के महाकाल मंदिर प्रबंधन पर तड़के 4 बजे होने वाली भस्म आरती में वीआईपी सुविधा देने का दबाव भी बनाया। जब अधिकारियों ने उससे प्रमाण मांगा, तो उसने पहले बात टालने की कोशिश की और फिर रौब झाड़ते हुए अपने परिवार के कई सदस्यों के आईएएस होने और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार का पत्र होने का दावा किया। महाकाल थाना प्रभारी गगन बादल और मंदिर प्रबंधन ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से सीधे सत्यापन किया, जिससे पता चला कि इस नाम का कोई संयुक्त सचिव नहीं है। पुलिस ने उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया।