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2026-07-27

मध्य प्रदेश में 151 यूनिट बिजली खपत पर सब्सिडी समाप्त, बिल में बड़ा उछाल

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली बिल के आंकड़े दर्शाते हैं कि बिजली खपत में मात्र एक यूनिट की वृद्धि कई बार पूरे बिल पर बड़ा असर डालती है। इसका मुख्य कारण मध्य प्रदेश शासन द्वारा 150 यूनिट तक प्रदान किया जाने वाला अनुदान है, जो 151 यूनिट होते ही समाप्त हो जाता है। इसी कारण 150 यूनिट तक अपेक्षाकृत कम बिल का भुगतान करने वाले उपभोक्ता 151 यूनिट पहुंचते ही सामान्य बिल श्रेणी में आ जाते हैं।

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उदाहरण के लिए, 100 यूनिट बिजली खपत पर ऊर्जा शुल्क 519 रुपये, स्थायी प्रभार 134 रुपये और विद्युत शुल्क 47 रुपये होता है। अन्य अधिभारों को जोड़कर मासिक बिल 706 रुपये बनता है। इसमें शासन का 606 रुपये का अनुदान मिलने के बाद उपभोक्ता को केवल 100 रुपये का अंतिम बिल चुकाना पड़ता है।

इसी प्रकार, 150 यूनिट तक मासिक बिल 1,026 रुपये बनता है। हालांकि, 606 रुपये के शासन अनुदान के कारण अंतिम देय राशि 420 रुपये रह जाती है।

जैसे ही खपत 151 यूनिट होती है, ऊर्जा शुल्क बढ़कर 809.55 रुपये, स्थायी प्रभार 330 रुपये और विद्युत शुल्क 82 रुपये हो जाता है। कुल मासिक बिल 1,231 रुपये बनता है, लेकिन इस स्तर पर शासन का अनुदान शून्य हो जाता है। परिणामस्वरूप, उपभोक्ता को पूरे 1,231 रुपये का भुगतान करना पड़ता है।

वहीं, 200 यूनिट पर ऊर्जा शुल्क 1,155 रुपये, स्थायी प्रभार 420 रुपये और विद्युत शुल्क 123 रुपये पहुंच जाता है, जिससे मासिक बिल 1,711 रुपये बनता है। 250 यूनिट पर अंतिम बिल 2,199 रुपये और 300 यूनिट पर 2,689 रुपये तक पहुंच जाता है। ईंधन व विद्युत क्रय समायोजन अधिभार भी खपत बढ़ने के साथ 5.76 रुपये से बढ़कर 20.65 रुपये तक पहुंच जाता है।

उपभोक्ताओं के लिए यह महत्वपूर्ण है कि 150 यूनिट तक बिजली खपत नियंत्रित रखने पर उन्हें शासन के अनुदान का सीधा लाभ मिलता है। लेकिन 151 यूनिट पर पहुंचते ही यह राहत समाप्त हो जाती है और ऊर्जा शुल्क, स्थायी प्रभार, विद्युत शुल्क सहित सभी मदों का पूरा भार उपभोक्ताओं पर आ जाता है। ऐसे में, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए मासिक बिजली खपत पर निगरानी रखना आर्थिक रूप से लाभदायक सिद्ध हो सकता है।