बुलंद सोच, भोपाल।
मध्य प्रदेश में एक बार फिर ‘चड्डी-बनियान गिरोह’ की सक्रियता देखी जा रही है। हाल ही में, भोपाल के प्रतिष्ठित आईपीएस स्कूल में इस गिरोह के बदमाशों ने ताले तोड़कर लगभग 3.92 लाख रुपये की फीस चोरी कर ली। इस घटना में परिसर में चार नाइट गार्ड्स की मौजूदगी के बावजूद चोरों ने आसानी से कई कार्यालयों के ताले तोड़े और फरार हो गए। इससे पहले, कटनी के रीठी इलाके में भी इस गिरोह के लगभग एक दर्जन हथियारबंद बदमाशों ने एक स्वर्ण व्यवसायी की दुकान में शटर तोड़कर डकैती डालने का प्रयास किया था। स्थानीय लोगों के शोर मचाने पर बदमाश वहां से भाग निकले थे। इन लगातार सामने आ रही वारदातों से लोगों के मन में डर का माहौल है।
गिरोह का कार्यप्रणाली
‘चड्डी-बनियान गिरोह’ भारत का एक कुख्यात और संगठित आपराधिक गिरोह है। इनके काम करने का तरीका काफी अनोखा और खतरनाक होता है। वारदात के समय ये बदमाश केवल चड्डी और बनियान पहनते हैं। भागने के दौरान पकड़े जाने से बचने के लिए ये अपने पूरे शरीर पर तेल या ग्रीस लगा लेते हैं। अपनी पहचान छिपाने के लिए ये चेहरे को कपड़े या मास्क से ढंकते हैं। यह गिरोह आमतौर पर 5 से 15 बदमाशों के समूह में हमला करता है और इनके पास रॉड, गुलेल, लाठी तथा धारदार हथियार होते हैं। ये दिन में फेरीवाले, कबाड़ी या मजदूर बनकर इलाकों की रेकी करते हैं। रात के अंधेरे में, आमतौर पर आधी रात से भोर के बीच, ये सूने मकानों, स्कूलों या दुकानों को निशाना बनाते हैं।
देशभर में गिरोह की सक्रियता
यह गिरोह केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई राज्यों में दशकों से सक्रिय रहा है। 1990 और 2000 के दशक में इस गिरोह ने मुंबई, ठाणे और अहमदाबाद के बाहरी इलाकों में कई हिंसक डकैतियों को अंजाम दिया था। मध्य प्रदेश (इंदौर, भोपाल, कटनी) और राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में यह गिरोह समय-समय पर सक्रिय होकर चोरियां करता रहा है। दिल्ली-एनसीआर से सटे इलाकों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी इस गिरोह के हमले दर्ज किए गए हैं। इस गिरोह के सदस्य वारदात के दौरान जरा सा भी विरोध होने पर जानलेवा हमला करने से नहीं हिचकते हैं।
बचाव के महत्वपूर्ण उपाय
दिन में आने वाले अनजान लोगों पर नजर रखें; यदि इलाके में कबाड़ी, फेरीवाले या संदिग्ध मजदूर बिना काम घूमते दिखें तो तुरंत पुलिस या सोसाइटी ग्रुप में जानकारी दें। अपने घर, दुकान या संस्थान के बाहर नाइट-विज़न सीसीटीवी कैमरे और गति महसूस करने वाली (मोशन सेंसर) लाइटें लगाएं। रात में संदिग्ध हलचल महसूस होने पर अकेले बाहर न निकलें; पड़ोसियों को फोन करें या सीटी/अलार्म बजाकर अलर्ट करें। शैक्षणिक संस्थानों और व्यापारिक परिसरों में गार्ड्स को लगातार गश्त करने के निर्देश दें और एंट्री-एग्जिट पॉइंट पूरी तरह सुरक्षित रखें। किसी भी आपात स्थिति में सीधे 112 (पुलिस हेल्पलाइन) पर कॉल करें और खुद बदमाशों से भिड़ने के बजाय सुरक्षित स्थान से शोर मचाएं।
