बुलंद सोच, भोपाल।

प्रदेश में एक लाख से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों को दस वर्ष बाद इस साल पदोन्नति दी गई है। सरकार अगले साल फिर से पदोन्नति देने की तैयारी कर रही है।
अगले साल की पदोन्नति प्रक्रिया में वे अधिकारी-कर्मचारी पात्र होंगे जो पांच वर्ष की सेवा पूरी करने जा रहे हैं। साथ ही, वे अधिकारी-कर्मचारी भी पदोन्नत किए जाएंगे जो वर्ष 2016 से पदोन्नति पर लगी रोक के कारण पदोन्नत नहीं हो पाए थे।
इन अधिकारियों-कर्मचारियों को वर्ष 2026 में पदोन्नति दी गई है, जबकि रोक नहीं होती तो उन्हें दूसरी पदोन्नति भी मिल चुकी होती। नियमों में बदलाव होने पर वे इस वर्ष भी विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) के विचार की परिधि में आएंगे।
इसके लिए प्रत्येक संवर्ग में पदोन्नति के लिए निर्धारित सेवा अवधि में छूट देनी होगी। इसके लिए पदोन्नति नियमों में संशोधन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अक्टूबर-नवंबर में पदोन्नति के लिए डीपीसी की बैठकें की जाएं। इन बैठकों से पहले पदोन्नति के नियमों में संशोधन करना आवश्यक होगा।
दरअसल, पदोन्नति पर लगी रोक के कारण प्रदेश में लंबे समय से अधिकारियों-कर्मचारियों को पदोन्नति नहीं मिल पा रही थी। इस साल सरकार ने पदोन्नति का रास्ता साफ करते हुए बड़ी संख्या में अधिकारियों-कर्मचारियों को पदोन्नति दी है।
अब सरकार अगले साल भी पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ाना चाहती है। इसमें इस साल पदोन्नत हुए अधिकारियों-कर्मचारियों के अलावा वे अधिकारी-कर्मचारी भी दायरे में आ सकते हैं, जिनकी निर्धारित सेवा अवधि पूरी नहीं हुई है।
समय से पहले पदोन्नति देने के लिए संबंधित संवर्ग के सेवा नियमों में निर्धारित न्यूनतम सेवा अवधि में छूट का प्रविधान करना होगा। इसके लिए शासन द्वारा नियमों में संशोधन की प्रक्रिया की जाएगी।
संशोधन के बाद ही विभागों में पदोन्नति के लिए डीपीसी की बैठकें आयोजित की जा सकेंगी। इन बैठकों में 31 दिसंबर 2027 तक रिक्त होने वाले प्रत्याशित पदों के साथ वर्ष 2026 में रिक्त हुए अप्रत्याशित पदों को शामिल किया जाएगा।
पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही अधिकारी और कर्मचारी संगठन भी पांच वर्ष की अनिवार्य सेवा के नियम को बदलने की मांग कर रहे थे।

