बुलंद सोच, इंदौर।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में सिंहस्थ मेले को देखते हुए नए घाट बनाने की तैयारी की जा रही है।
हालांकि, इसके लिए प्राकृतिक चट्टानों और प्राचीन घाटों को तोड़े जाने से कई लोग नाराज हैं।
इस संबंध में इंदौर के कुछ वकील जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका लगाने की तैयारी कर रहे हैं और संभागायुक्त भास्कर लक्षकार को ज्ञापन भी दिया गया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि नर्मदा किनारे सैकड़ों साल पहले बनाए गए प्राचीन घाटों को तोड़कर नए घाट बनाए जा रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, प्राकृतिक चट्टानें नदी में तेज बहाव के दौरान मिट्टी के कटाव को रोकती हैं, लेकिन निर्माण एजेंसियां उन्हें भी तोड़ रही हैं।
वकीलों ने ब्रह्मपुरी क्षेत्र में पुराने घाटों को तोड़े जाने के प्रमाण भी पेश किए हैं।
उनका कहना है कि इससे ओंकारेश्वर की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान प्रभावित होने की आशंका है।
अधिवक्ताओं का मत है कि ओंकारेश्वर की पहचान केवल ज्योतिर्लिंग मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि ओंकार पर्वत, मां नर्मदा, प्राचीन घाट और परिक्रमा मार्ग इस तीर्थ की सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा के अभिन्न अंग हैं।
अधिवक्ताओं के संगठन ने निर्माण कार्यों की जांच कराने, पर्यावरणीय और विरासत संबंधी प्रभावों का परीक्षण करने तथा जांच पूरी होने तक संबंधित निर्माण कार्यों पर रोक लगाने की मांग की है।
वकीलों ने कहा कि यदि जल्द ही निर्माण कार्यों पर रोक नहीं लगाई गई तो इंदौर अधिवक्ता संघ इस मामले को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगा।
उल्लेखनीय है कि सिंहस्थ मेले के दौरान उज्जैन के अलावा बड़ी संख्या में श्रद्धालु ओंकारेश्वर भी पहुंचेंगे, जिसके कारण वहां भी एक साथ कई विकास कार्य शुरू किए गए हैं।

