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2026-08-10

सीमावर्ती क्षेत्रों में सौर, पवन और हाइब्रिड परियोजनाओं के लिए गृह मंत्रालय की मंजूरी अनिवार्य

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच,।

सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी सौर, पवन या हाइब्रिड परियोजना को स्थापित करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। गृह मंत्रालय ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सोलर पावर या ऊर्जा से संबंधित अन्य परियोजनाओं में काम करने वाले इंजीनियरों, कर्मियों और श्रमिकों को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यदि पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश से संबंधित कोई व्यक्ति सीमावर्ती क्षेत्र में इंजीनियर या अन्य स्टाफ के रूप में नियुक्त है, तो उसके लिए केंद्र सरकार से इजाजत लेनी होगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ये सभी दिशा-निर्देश राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर जारी किए हैं।

साइट और स्टाफ निगरानी

जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, परियोजना स्थल पर निगरानी और वहां काम कर रहे स्टाफ की जांच के लिए एक समर्पित पुलिस चौकी स्थापित की जाए। वहां आने वाले विदेशी नागरिकों पर कड़ी नजर रखी जाए। सीमावर्ती क्षेत्र में कार्यरत सभी स्टाफ का प्रवेश से पहले सत्यापन अनिवार्य होगा। बॉर्डर के आसपास आवास, कैफेटेरिया आदि सुविधाओं के संबंध में भी दिशा-निर्देश जारी हुए हैं। यदि इन सुविधाओं के कारण बॉर्डर एरिया में भीड़ जुटने और सुरक्षा व्यवस्था पर असर पड़ने की संभावना है, तो इनकी अनुमति न दी जाए। रहने का स्थान या होटल बॉर्डर से पांच किलोमीटर की दूरी पर होने चाहिए। परियोजना परिसर के अंदर कैफेटेरिया खोलने की इजाजत दी जा सकती है।

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निर्माण ऊंचाई और प्रक्रिया

नियंत्रण रेखा (एलओसी) और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर होने वाले निर्माण की ऊंचाई तय कर दी गई है। यदि एलओसी या एलएसी से आठ किलोमीटर दूर कोई निर्माण हो रहा है, तो उसकी ऊंचाई तीन मीटर होगी। आठ से बीस किलोमीटर की दूरी पर ऊंचाई पांच मीटर रहेगी, जबकि बीस से पचास किलोमीटर की दूरी पर ऊंचाई 15 मीटर तक हो सकती है। यह नियम पवन चक्की आदि पर लागू नहीं होगा। सौर, पवन और हाइब्रिड ऊर्जा परियोजना का आवेदन नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के पास जाएगा, जिसके बाद फाइल गृह मंत्रालय के पास सुरक्षा मंजूरी के लिए पहुंचेगी। इसके उपरांत रक्षा मंत्रालय से अनापत्ति पत्र हासिल करना होगा। कोई भी आवेदन सीधे गृह मंत्रालय या रक्षा मंत्रालय में नहीं आएगा, बल्कि संबंधित मंत्रालय के माध्यम से ही इन मंत्रालयों तक फाइल पहुंचेगी। ऐसे मामलों का निपटारा गृह मंत्रालय द्वारा साठ दिन में किया जाएगा।

प्रतिबंधित क्षेत्र

बॉर्डर से 50 किलोमीटर के भीतर सौर, पवन और हाइब्रिड परियोजनाओं के लिए गृह मंत्रालय की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। एक किलोमीटर का क्षेत्र पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, जहां किसी भी तरह की गतिविधि या परियोजना लगाने की इजाजत नहीं मिलेगी। एक किलोमीटर से पचास किलोमीटर तक सुरक्षा मंजूरी या एक किलोमीटर से बीस किलोमीटर तक अनापत्ति प्रमाण पत्र देने का काम गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय का रहेगा।