बुलंद सोच, उज्जैन।

उज्जैन में विकसित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की तकनीक अब वैश्विक स्तर पर नए स्वरूप में पहुंच रही है। ‘आरोहणम् वैदिक घड़ी’ का पहला व्यावसायिक संस्करण जारी किया गया है, जिसे विश्व की पहली वैदिक टाइम हेरिटेज इंस्टालेशन बताया जा रहा है। इसे भारत और विदेश के एयरपोर्ट, होटल, संग्रहालय, मंदिर, कॉरपोरेट मुख्यालय तथा सांस्कृतिक संस्थानों में स्थापित करने की तैयारी है।
यह उज्जैन में विकसित वैदिक कालगणना तकनीक को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने की दिशा में पहला व्यावसायिक कदम माना जा रहा है। इस घड़ी का पहला ऑर्डर लखनऊ स्थित लेटे हनुमान मंदिर से प्राप्त हुआ है।
यह डिजिटल इंस्टालेशन सामान्य घड़ी की तरह केवल घंटे और मिनट नहीं बताती है। इसमें भारतीय वैदिक कालगणना के अनुसार तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, मुहूर्त, पर्व-त्योहार और पंचांग रियल टाइम में प्रदर्शित होते हैं।
यह छह फीट ऊंची इंस्टालेशन जिस शहर या देश में स्थापित की जाएगी, वहां के अक्षांश-देशांतर और खगोलीय गणनाओं के आधार पर स्थानीय सूर्योदय के अनुसार स्वतः वैदिक समय प्रदर्शित करेगी। इससे हर स्थान पर वास्तविक वैदिक समय की जानकारी उपलब्ध होगी।
इस तकनीक की शुरुआत 29 फरवरी 2024 को हुई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्जैन में विश्व की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का लोकार्पण किया था। इसके बाद इसी तकनीक पर आधारित एक मोबाइल ऐप विकसित किया गया, जिसमें 3179 विक्रम पूर्व से सात हजार वर्षों से अधिक की भारतीय कालगणना, 30 प्रकार के शुभ-अशुभ मुहूर्त, पंचांग, व्रत-त्योहार, सूर्योदय-सूर्यास्त, मौसम और अन्य जानकारियां उपलब्ध कराई गईं। यह ऐप 189 से अधिक भाषाओं में संचालित हो सकता है। अब यही तकनीक स्थायी डिजिटल इंस्टालेशन के रूप में दुनिया के प्रतिष्ठानों तक पहुंचाई जा रही है।
108 विशेष संस्करण
इस परियोजना को विकसित करने वाले आरोह श्रीवास्तव ने उज्जैन की मूल विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की डिजाइन तैयार की थी। उन्होंने बताया कि शुरुआती चरण में 108 फाउंडर एडिशन तैयार किए जाएंगे। प्रत्येक इंस्टालेशन के साथ यूनिक सीरियल नंबर, फाउंडर के हस्ताक्षर और सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिनैलिटी प्रदान किया जाएगा। इसकी शुरुआती कीमत 2.49 लाख रुपये निर्धारित की गई है। पहला ऑर्डर लखनऊ के गोमती तट स्थित लेटे हनुमान मंदिर से प्राप्त हो चुका है, जहां इसे जल्द स्थापित किया जाएगा।
राष्ट्रीय पहचान के बाद अब वैश्विक
उज्जैन की वैदिक घड़ी राष्ट्रीय स्तर पर पहले ही पहचान बना चुकी है। अप्रैल 2026 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट कर चुके हैं। यह घड़ी वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में भी स्थापित है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसकी कार्यप्रणाली का अवलोकन कर चुके हैं।
अब इसका व्यावसायिक संस्करण भारतीय कालगणना को दुनिया के प्रमुख संस्थानों तक पहुंचाने की दिशा में अगला कदम माना जा रहा है।
प्रमुख विशेषताएँ
इसकी प्रमुख विशेषताओं में स्थानीय सूर्योदय और खगोलीय गणनाओं के आधार पर स्वतः बदलता वैदिक समय शामिल है। यह रियल टाइम में तिथि, नक्षत्र, योग, करण, मुहूर्त, वार और पंचांग की जानकारी प्रदान करती है। इसे होटल, एयरपोर्ट, मंदिर, संग्रहालय, कॉरपोरेट और सांस्कृतिक संस्थानों में स्थापना के लिए विकसित किया गया है। यह भारतीय वैदिक कालगणना को आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने की एक पहल है।
संख्याएँ
वैदिक घड़ी की ऊंचाई 6 फीट है। इसके 108 फाउंडर एडिशन तैयार किए जाएंगे और इसकी शुरुआती कीमत 2.49 लाख रुपये है।

