बुलंद सोच, ग्वालियर।

राज्य साइबर पुलिस को चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय को क्रिप्टो करेंसी में निवेश का झांसा देकर 21.05 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में दूसरी बड़ी सफलता मिली है। राज्य साइबर पुलिस ने सागर से रतलाम निवासी अकाउंट हैंडलर अंकित वर्मा को गिरफ्तार किया है। अंकित पर ठगी की रकम की हेराफेरी के लिए शाजापुर निवासी भाजपा के जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार मालवीय द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खाते का उपयोग करने का आरोप है।
अकाउंट हैंडलर का विस्तृत नेटवर्क
अंकित वर्मा स्वयं इन खातों को संचालित कर रहा था। वह केवल इस ठगी में ही शामिल नहीं है, बल्कि उत्तर भारत के छह राज्यों के म्यूल खातों का भी एक बड़ा राजदार है। राज्य साइबर पुलिस को उसके मोबाइल और लैपटॉप से चौंकाने वाले रिकॉर्ड मिले हैं, जिनकी पड़ताल जारी है। अंकित वर्मा म्यूल खातों की हैंडलिंग करता था, जबकि विदेश में बैठे सरगना टेलीग्राम ऐप के माध्यम से पूरा नेटवर्क चला रहे थे।
भाजपा नेता की संलिप्तता और कमीशन
राज्य साइबर पुलिस ने इससे पहले शाजापुर से जिला पंचायत सदस्य और भाजपा नेता जगदीश कुमार मालवीय निवासी ग्राम सिमरोल, गुलाना, शाजापुर को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उन्होंने बताया था कि उन्होंने ‘सर्व कल्याण अनुसूचित जाति एवं जनजाति’ नामक संस्था का खाता ठगी की रकम की हेराफेरी के लिए उपलब्ध कराया था। भाजपा नेता जगदीश को घर बैठे दो प्रतिशत कमीशन मिलता था, जबकि बाकी पूरा काम अंकित ही करता था।
अंकित वर्मा की गिरफ्तारी और कार्यप्रणाली
भाजपा नेता जगदीश मालवीय ने पूछताछ में बताया कि उनके खाते को रतलाम के इंद्रानगर निवासी अंकित शर्मा (वर्मा) हैंडल कर रहा था और वह बिहार के पटना में बैठकर यह कार्य कर रहा था। इसके बाद डीएसपी संजीव नयन शर्मा, निरीक्षक मुकेश नारोलिया, एसआई हिमानी दुबे और आरक्षक पुष्पेंद्र यादव की टीम उसकी तलाश में जुटी। पुलिस को उसकी लोकेशन सागर में मिली, जहां से उसे दबोच लिया गया।
इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि और म्यूल खातों का संचालन
आरोपित अंकित पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर है और उसका खुद का वर्कशॉप भी है। वह पिछले करीब डेढ़ साल से म्यूल खातों को हैंडल कर रहा था। सबसे पहले वह टेलीग्राम ऐप से जुड़ा था। तकनीकी ज्ञान में अच्छा होने के कारण विदेश में बैठे सरगना ने उसे अकाउंट हैंडलिंग का काम सौंपा था। म्यूल खातों का रिकॉर्ड उसके पास रहता था। ठगी की रकम जैसे ही किसी एक खाते में आती थी, वह उसे देशभर के अन्य म्यूल खातों में भेजने का काम करता था। वह खाताधारकों को उनका कमीशन भेजता था और बाकी खातों का उपयोग स्वयं करता था।
एपीके फाइल के जरिए नेटवर्क का संचालन
यह पूरा नेटवर्क एपीके फाइल के जरिए ऑपरेट हो रहा था। खाताधारकों को एपीके फाइल डाउनलोड कराकर ठग स्वयं खाते का एक्सेस ले लेते थे। इससे ओटीपी ठगों के पास ही आते थे। ऐसे में पुलिस नेटवर्क में उलझ जाती थी, क्योंकि लोकेशन दूसरे राज्य की मिलती थी, जबकि खाताधारक दूसरे राज्य में बैठा होता था।
छह राज्यों में उपयोग हुआ जिपं सदस्य का खाता
जिला पंचायत सदस्य द्वारा उपलब्ध कराया गया बैंक खाता मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब सहित छह राज्यों में हुई साइबर ठगी की वारदातों में इस्तेमाल हुआ है। लंबे समय से इस खाते में ठगी का पैसा आ रहा था। ठगी का पैसा फ्रीज होने से पहले ही दूसरे खातों में चला जाता था, यह कार्य अंकित वर्मा करता था।
पुलिस का बयान
राज्य साइबर पुलिस के डीएसपी संजीव नयन शर्मा ने बताया कि सागर से अकाउंट हैंडलर पकड़ा गया है। वह एपीके फाइल के जरिए खाता ऑपरेट करता था। यही खाता देश के छह राज्यों में हुई साइबर ठगी की अन्य वारदातों में भी इस्तेमाल हुआ है। आरोपितों से पूछताछ जारी है।

