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2026-08-10

पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को 18 माह बाद हाईकोर्ट से जमानत

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

सौरभ शर्मा, मध्य प्रदेश परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक, जिन्हें करीब डेढ़ साल पहले पांच जांच एजेंसियों के निशाने पर आने के बाद भोपाल में गिरफ्तार किया गया था, आखिरकार 18 माह बाद जेल से बाहर आ गए हैं। उच्च न्यायालय जबलपुर ने उन्हें 10 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही जमानत राशि अदा करने पर जमानत दे दी है। हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद सौरभ शर्मा को भोपाल केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया है।

उन पर कई मामले दर्ज हैं। ईडी, आयकर, मध्य प्रदेश लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू और भोपाल पुलिस अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर जांच कर रही हैं। शर्मा पर परिवहन विभाग में आरक्षक रहते हुए विभाग के आला अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर उन्हें अपने इशारे पर चलाने के आरोप लगते रहे हैं। शर्मा पर प्रदेश के कई जिलों में संचालित परिवहन चेकपोस्ट पर निजी व्यक्तियों के जरिए अवैध कमाई करने और विभागीय अधिकारियों से लेकर राजनेताओं तक पैसे पहुंचाने के आरोप भी लगते रहे हैं।

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सौरभ शर्मा को फरवरी 2025 में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद से वह जेल में ही थे।

हाईकोर्ट ने अपने जमानत आदेश में कहा है कि जमानत मिलने का यह अर्थ कतई नहीं है कि आरोपों से मुक्ति मिल गई है। शर्मा को ट्रायल कोर्ट में होने वाली प्रत्येक सुनवाई में उपस्थित रहना होगा। न्यायालय की अनुमति के बिना उन्हें देश छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें किसी भी गवाह को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करने की भी शर्त लगाई गई है।

अदालत ने माना कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। ट्रायल शुरू हो चुका है तथा गवाहों और दस्तावेजों की संख्या अधिक होने से मुकदमे के शीघ्र निपटारे की संभावना कम है। ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना उचित नहीं माना जा सकता।

जांच में शामिल एजेंसियां

लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ शर्मा के अरेरा कॉलोनी स्थित निवास, इसी कॉलोनी में स्थित निजी स्कूल के कार्यालय और अन्य ठिकानों पर छापा मारकर करोड़ों की चल-अचल संपत्ति बरामद की थी।

इसी बीच अरेरा कॉलोनी से एक इनोवा मंडोरी गांव तक पहुंचकर एक खाली प्लॉट में खड़ी हो गई। आयकर विभाग को सूचना मिली तो आधी रात को आयकर विभाग की टीम मौके पर पहुंची और इनोवा का लॉक तोड़कर जांच की तो कार के अंदर 52 किलोग्राम सोने के बिस्किट और 11 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए।

इसकी जांच आयकर विभाग ने की और बाद में ईडी की इसमें एंट्री हुई। ईडी ने ही सौरभ शर्मा को मनी लॉन्ड्रिंग सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज कर पहली बार गिरफ्तार किया था।

आयकर विभाग ने जांच में यह पाया कि इनोवा में मिला सोना और नकदी सौरभ शर्मा की ही थी। क्योंकि सौरभ की कंपनी में काम करने वाले चेतन के नाम इनोवा थी और उसका उपयोग सौरभ की कंपनी के कार्यालय में होता था।

आयकर विभाग 52 किलोग्राम सोना और 11 करोड़ रुपये को बेनामी संपत्ति घोषित कर उसे राजसात करे या उसे सौरभ शर्मा की गलती मानकर कार्रवाई करे, इस उलझन में है। क्योंकि शर्मा या उससे जुड़े किसी भी व्यक्ति ने संपत्ति पर दावा नहीं किया।

लोकायुक्त पुलिस शर्मा की परिवहन आरक्षक की नौकरी की अवधि में अकूत संपत्ति की जांच कर रही थी, और इसी केस में छापा मारा था।

सौरभ उमा शर्मा ने शपथ पत्र दिया था कि उनके घर का कोई भी सदस्य शासकीय नौकरी में नहीं है। नौकरी पाने के लिए झूठा शपथ-पत्र देने पर भोपाल पुलिस ने सौरभ शर्मा और उनकी मां उमा शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण भी दर्ज किया है।

फेमा कानून के उल्लंघन की जांच

52 किलोग्राम सोना मिलने और उसके दस्तावेज नहीं मिलने की जांच में डायरेक्ट्रोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) भी शामिल हो गई है। डीआरआई यह पता लगा रही है कि इस सोने को खरीदने के लिए किस विधि से भुगतान किया गया, क्या फेमा कानून का उल्लंघन किया गया, या कस्टम ड्यूटी को लेकर गड़बड़ी की गई है।

अकूत संपत्ति मिलने की जांच में ईडी भी शामिल है। ईडी जांच कर रही है कि अपराध से अर्जित धन क्या मनी ट्रेल है? यह असल में किसकी संपत्ति है, कहीं किसी हाईप्रोफाइल अधिकारी-नेता की बेनामी संपत्ति तो नहीं।