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2026-08-10

भोपाल में ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक आज, घोषणापत्र होगा जारी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

भोपाल में शनिवार को ब्रिक्स देशों के संस्कृति मंत्रियों की बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें वे अपने-अपने देशों की सांस्कृतिक विरासत, संग्रहालय, रचनात्मक अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और ‘लोगों से लोगों के बीच जुड़ाव’ के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर मंथन करेंगे।

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ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन-2026 की शुरुआत 5 अगस्त से हुई थी, जिसका चौथा दिन शनिवार महत्वपूर्ण है।

यह बैठक ‘ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की घोषणा’ को अपनाने के साथ समाप्त होगी, जो ब्रिक्स ढांचे के भीतर बेहतर सांस्कृतिक सहयोग के लिए एक साझा दृष्टिकोण और भविष्य का रोडमैप निर्धारित करेगी।

बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दोपहर के भोजन (लंच) का कार्यक्रम होगा।

सभी मंत्री शुक्रवार को भोपाल पहुंच गए थे, जिनका परंपरागत रूप से स्वागत किया गया।

सांस्कृतिक यात्रा

बैठक और भोजन के बाद विदेशी मंत्री एवं प्रतिनिधिमंडल भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत और स्थापत्य कला के अवलोकन के लिए यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल ‘सांची’ के लिए प्रस्थान करेंगे।

प्रतिनिधि ‘बुद्ध जंबूदीप’ का भ्रमण करेंगे और तत्पश्चात विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप का एक विशेष गाइडेड टूर लेंगे।

यात्रा के दौरान प्रतिनिधि चेतियागिरी मंदिर में दर्शन के साथ-साथ योग एवं ध्यान सत्र में भाग लेंगे।

शाम को बौद्ध इतिहास और कला पर आधारित एक आकर्षक 3D प्रोजेक्शन मैपिंग तथा लाइट एंड साउंड शो का आयोजन किया जाएगा।

विशेष व्यंजन

सदस्य देश के संस्कृति मंत्रियों के लिए लंच और डिनर में खास मैन्यू तैयार किया गया है।

लंच और डिनर में मेहमानों को प्रदेश के प्रमुख व्यंजन जैसे दाल बाफले, निमोना, रिकमच, गुइया की सब्जी, चंबल का थोपा, चंदिया, बड़ा और स्वास्थ्यवर्धक मिलेट्स पर आधारित कोदो व कुटकी आदि शामिल किए गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय अतिथियों के स्वाद और प्राथमिकताओं का ध्यान रखते हुए वेस्टर्न (पश्चिमी) और ओरिएंटल व्यंजनों की भी श्रृंखला परोसी जा रही है।

वैकल्पिक भ्रमण

अगस्त को इच्छुक विदेशी प्रतिनिधियों के लिए उनकी आगे की रवानगी से पहले यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भीमबेटका शैलाश्रय के लिए एक वैकल्पिक भ्रमण की व्यवस्था की गई है।

यह यात्रा दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण प्रागैतिहासिक सांस्कृतिक परिदृश्यों में से एक और भारत की असाधारण शैल कला (रॉक आर्ट) विरासत का अनुभव करने का अवसर प्रदान करेगी।