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2026-08-10

मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन लक्ष्य से पीछे; सीहोर में 43% परिवारों तक नल जल नहीं

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच।

मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत 77.21 प्रतिशत परिवारों तक नल जल पहुंचने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, जिला स्तर के आधिकारिक आंकड़े इस दावे से अलग तस्वीर दिखाते हैं। प्रदेश के 55 जिलों में से 23 जिलों में नल जल कवरेज 70 प्रतिशत से कम है। इनमें से 8 जिलों की स्थिति सबसे खराब है, जहां आधे परिवारों तक भी नल जल नहीं पहुंच सका है।

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प्रमुख जिलों में कवरेज

केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर में करीब 43 प्रतिशत परिवारों तक अब भी नल का पानी नहीं पहुंचा है। सीहोर में 56.95 प्रतिशत परिवारों तक ही नल जल पहुंचा है। विदिशा में करीब 33 प्रतिशत परिवारों तक अब भी नल का पानी नहीं पहुंचा है। विदिशा में 66.67 प्रतिशत परिवारों तक ही नल जल पहुंचा है। सतना, छतरपुर और सिंगरौली समेत प्रदेश के 8 जिलों में आधे से ज्यादा परिवार आज भी नल जल सुविधा से वंचित हैं। जल जीवन मिशन के जिला स्तरीय आंकड़ों के अनुसार, मऊगंज में 49.86 प्रतिशत, अशोकनगर में 46.53 प्रतिशत, पन्ना में 45.26 प्रतिशत, सतना में 43.34 प्रतिशत, अलीराजपुर में 42.78 प्रतिशत, छतरपुर में 42.77 प्रतिशत, सिंगरौली में 40.62 प्रतिशत और मैहर में केवल 40.20 प्रतिशत परिवारों के पास ही घरेलू नल जल कनेक्शन हैं। इसका अर्थ है कि इन आठ जिलों में आधे से अधिक परिवार अब भी नल जल सुविधा से वंचित हैं। इनके अलावा, जबलपुर, बड़वानी, डिंडोरी, टीकमगढ़, रतलाम, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, गुना, नीमच, रीवा, शिवपुरी और सिधी जैसे जिले भी 70 प्रतिशत कवरेज के स्तर तक नहीं पहुंच सके हैं।

कवरेज में पिछड़ने के कारण

लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) के अनुसार, कम कवरेज वाले अधिकांश जिले बहु-ग्राम जल योजनाओं (एमवीएस) और थोक जल आपूर्ति परियोजनाओं पर निर्भर हैं। इनमें से कई परियोजनाएं अभी निर्माण, कार्यान्वयन या पूर्णता के विभिन्न चरणों में हैं। इनके पूरा होने के बाद कवरेज में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

जल गुणवत्ता परीक्षण की व्यवस्था

प्रदेश में जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए कुल 155 प्रयोगशालाएं संचालित हैं। इनमें 103 उप-मंडल स्तर, 51 जिला स्तर और एक राज्य स्तरीय प्रयोगशाला शामिल है। सभी प्रयोगशालाओं में सूक्ष्मजीवी (माइक्रोबायोलॉजिकल) जांच की सुविधा उपलब्ध है। हालांकि, बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) की जांच केवल राज्य स्तरीय प्रयोगशाला में होती है। वहीं, रासायनिक विषाक्तता की जांच की सुविधा अभी उपलब्ध नहीं है।