बुलंद सोच, भोपाल।
राजधानी भोपाल में देर रात गश्त पर निकली पुलिस टीम पर हमला कर नशे में धुत दो युवकों ने कानून व्यवस्था को चुनौती दी। भानपुर ब्रिज के पास एक लहराती कार को रोककर जांच करना पुलिसकर्मियों को महंगा पड़ा। कार में सवार जीजा-साले ने पहले गाली-गलौज की, फिर एक आरक्षक पर हमला कर उसका चेहरा लहूलुहान कर दिया और वर्दी भी फाड़ डाली। बीच-बचाव करने आए दूसरे आरक्षक से भी मारपीट की गई।
घटना की सूचना मिलने पर आसपास गश्त कर रही पुलिस टीमों ने घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत जेल भेज दिया है।
छोला मंदिर थाने में पदस्थ आरक्षक गुलाब किरार शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात लगभग 2:30 बजे अपने साथी आरक्षक मनोज कुशवाहा के साथ चार्ली वाहन पर क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। भानपुर ब्रिज से डेंटल कॉलेज की ओर जाने वाली पुलिया के पास सामने से एक कार लहराती हुई आ रही थी। दुर्घटना की आशंका को देखते हुए आरक्षक गुलाब किरार ने कार रुकवाकर जांच शुरू की।
पुलिस के अनुसार, कार में सवार दोनों युवक शराब के नशे में थे। जैसे ही आरक्षक गुलाब किरार ने वाहन की तलाशी लेना शुरू किया, दोनों आरोपी भड़क उठे। आरोपियों ने पहले पुलिसकर्मियों से अभद्रता और गाली-गलौज की, फिर अचानक उन पर हमला कर दिया।
आरोपी अनुराग साहू ने आरक्षक गुलाब किरार के चेहरे पर जोरदार मुक्का मारा। उसके हाथ में पहना कड़ा आरक्षक की आंख के नीचे लगा, जिससे आरक्षक गंभीर रूप से घायल होकर खून से लथपथ हो गया। हमले के दौरान आरोपियों ने आरक्षक की वर्दी भी फाड़ दी। साथी आरक्षक मनोज कुशवाहा ने जब बीच-बचाव करने का प्रयास किया, तो उसके साथ भी मारपीट की गई।
घायल आरक्षक ने तत्काल वायरलेस पर घटना की सूचना दी। कुछ ही देर में आसपास गश्त कर रही पुलिस टीमें मौके पर पहुंचीं और घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को पकड़ लिया।
पूछताछ में आरोपियों की पहचान 26 वर्षीय अनुराग साहू, निवासी देहगांव (रायसेन) और वर्तमान निवासी सिद्धार्थ लेकसिटी, आनंद नगर, तथा उसके 28 वर्षीय साले हेमंत साहू, निवासी देहगांव और वर्तमान निवासी राजेंद्र नगर, इंदौर के रूप में हुई।
दोनों आरोपी निजी फाइनेंस कंपनियों में कार्यरत हैं। पुलिस पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे जेल रोड क्षेत्र में एक पार्टी से लौट रहे थे।
पुलिस ने आरोपियों की कार जब्त कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। दोनों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत जेल भेज दिया गया।

