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2026-07-31

भोपाल में ई-बस सेवा का व्यावसायिक संचालन शुरू, पहले दिन 10 बसें सड़कों पर

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

शहर में बहुप्रतीक्षित ई-बस सेवा का व्यावसायिक संचालन गुरुवार से शुरू हो गया। पहले दिन बैरागढ़ डिपो से सुबह छह बजे दो रूटों पर 10 बसें उतारी गईं, जो रात आठ बजे तक चलीं। इन एसी बसों के संचालन से यात्रियों को सस्ता, सुरक्षित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मिला है। हालांकि, कई बस स्टॉप पर ऑटो और ई-रिक्शा खड़े होने के कारण बसों को यात्रियों के लिए निर्धारित स्थान पर रुकने में परेशानी हुई।

संचालन और यात्री अनुभव

भोपाल के लिए स्वीकृत 100 ई-बसों में से 30 बसें शहर में आ चुकी हैं। गुरुवार को इनमें से 10 बसों का व्यावसायिक संचालन आरंभ किया गया। बैरागढ़ डिपो से सुबह 5 बजे एक-एक कर बसें पहले चिरायु अस्पताल पहुंचीं, जिसके बाद वे बोर्ड ऑफिस के लिए रवाना हुईं। बसों को लगभग 15 से 20 मिनट के अंतराल में रवाना किया गया। आरंभ में बसों में इक्का-दुक्का यात्री ही सवार हुए, लेकिन बोर्ड ऑफिस पहुंचने पर यात्रियों की संख्या बढ़ी। विशेषकर कोलार के बैरागढ़ चीचली आने-जाने के दौरान बसों में अच्छी भीड़ देखी गई। बीसीएलएल के अधिकारियों के अनुसार, पहले दिन लगभग दो हजार यात्रियों ने ई-बसों में यात्रा की, जिससे करीब 26 हजार रुपये का किराया प्राप्त हुआ। अधिकारियों ने बताया कि जैसे-जैसे लोगों को रूट और समय की जानकारी मिलेगी, यात्रियों की संख्या में वृद्धि होगी। पहले दिन नई ई-बसों को लेकर लोगों में उत्सुकता के साथ भ्रम भी देखा गया। सुभाष एक्सीलेंस स्कूल चौराहे पर एक बस स्टॉप पर खड़े छात्र प्रिंस को देखकर कंडक्टर ने बस रोकी और पूछा कि उसे कहां जाना है। छात्र ने जवाब दिया कि उसे रेड बस से जाना है, जिस पर कंडक्टर ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह भी नगर निगम की नई ई-बस है। इसके बाद छात्र बस में सवार हो गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि शहर के कई लोग अभी नई ई-बस सेवा और उसके मार्गों से पूरी तरह परिचित नहीं हैं।

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तकनीकी सुविधाएँ और टिकटिंग

नई ई-बसों में यात्रियों की सुविधा और संचालन व्यवस्था को तकनीक से जोड़ा गया है। प्रत्येक बस को एक अलग पहचान संख्या दी गई है, जिससे उसके संचालन मार्ग की पहचान की जा सकेगी। बसों के आगे और पीछे डिजिटल एलईडी डिस्प्ले लगाए गए हैं, जिन पर संबंधित रूट का नाम लगातार प्रदर्शित होता है। इससे यात्रियों को दूर से ही बस के मार्ग की जानकारी मिल जाती है। यात्रियों के लिए चलो ऐप के माध्यम से बसों की लाइव लोकेशन देखने की सुविधा भी शुरू की गई है। ई-बसों की टिकटिंग व्यवस्था की जिम्मेदारी चलो कंपनी को सौंपी गई है, जिसके तहत इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन (ईटीएम) से टिकट दिए जाएंगे। बसों में लगे सेंसर बेस्ड पैसेंजर काउंटिंग सिस्टम के जरिए यात्रियों के चढ़ने और उतरने की गिनती भी होती है। यात्री किराए का भुगतान नकद के साथ-साथ यूपीआई के माध्यम से भी कर सकते हैं, जिससे खुले पैसे की समस्या दूर होती है। दिव्यांग यात्रियों के लिए बसों में हाइड्रोलिक रैंप और व्हीलचेयर पर आने वाले यात्रियों के लिए अलग स्थान भी बनाया गया है, ताकि वे आसानी से यात्रा कर सकें।

निर्धारित मार्ग

बीसीएलएल अधिकारियों के अनुसार, ई-बसें रोजाना सुबह साढ़े छह बजे से रात आठ बजे तक संचालित होंगी। इनका मार्ग चिरायु से बैरागढ़ होते हुए लालघाटी, कलेक्ट्रेट के सामने से रॉयल मार्केट, पीरगेट होते हुए मोती मस्जिद, कमला पार्क से पॉलिटेक्निक, बाणगंगा, न्यू मार्केट, लिंक रोड नंबर एक से बोर्ड ऑफिस मेट्रो स्टेशन तक होगा। बोर्ड ऑफिस से बसें दो रूटों पर डायवर्ट होंगी। पहला रूट चेतक ब्रिज से सुभाष नगर, प्रभात चौराहा, अशोका गार्डन होते हुए रेलवे स्टेशन और कोच फैक्ट्री तक जाएगा। दूसरा रूट बोर्ड ऑफिस से बीजेपी कार्यालय, बिट्टन मार्केट से शाहपुरा, बंसल अस्पताल, चुनाभट्टी होते हुए कोलार बैरागढ़ चीचली तक संचालित होगा।

यात्रियों की प्रतिक्रिया

नौकरीपेशा राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि वे कोलार क्षेत्र से बोर्ड ऑफिस जॉब के लिए प्रतिदिन आते हैं। पहले बसों के पूरी तरह संचालन न होने के कारण वे ई-रिक्शा से आते थे, जिसका दोनों तरफ का किराया 60 रुपये लगता था। अब इन बसों से दोनों तरफ का किराया 44 रुपये लगेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ई-रिक्शा के बेतरतीब चलने से हादसों का खतरा बना रहता था। छात्र आदित्य जैन ने बताया कि पहले बसों के न चलने से कभी कार, कभी बाइक तो कभी ऑटो से कॉलेज जाना पड़ता था, जिसमें 500 रुपये तक खर्च हो जाते थे। अब बस से आना-जाना दोनों करीब 50 रुपये में हो जाता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि बसों के स्टॉपेज और रखरखाव सही तरीके से होना चाहिए।