बुलंद सोच।
राज्य सरकार ने खेती-किसानी से जुड़ी दो अहम सेवाओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे से बाहर कर दिया है। इनमें मिट्टी के नमूनों की जांच और बीज की पड़ताल (सर्विस सैंपल) शामिल हैं।
अब इन जांचों की रिपोर्ट देने के लिए कोई तय समय-सीमा नहीं होगी। लोक सेवा प्रबंधन विभाग ने इसका गजट नोटिफिकेशन जारी किया है।
वर्ष 2017 में इन दोनों सेवाओं को लोक सेवा गारंटी कानून में शामिल किया गया था। इसके तहत मिट्टी जांच की रिपोर्ट 30 दिन और बीज जांच की रिपोर्ट 60 दिन में देना अनिवार्य था।
देरी होने पर किसान अपील कर सकते थे और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का प्रावधान था।
अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश की कृषि प्रयोगशालाओं में नमूनों का दबाव अधिक है। सीमित संसाधनों व जांच की वैज्ञानिक प्रक्रिया के कारण तय समय में रिपोर्ट देना कई बार संभव नहीं हो पाता था। समय-सीमा पूरी नहीं होने पर अधिकारियों पर पेनल्टी का प्रावधान भी था।
अब इन सेवाओं के गारंटी से बाहर होने के बाद किसान तय अवधि में जांच रिपोर्ट पाने का कानूनी दावा नहीं कर सकेंगे। देरी होने पर लोक सेवा गारंटी कानून के तहत अपील या दंड की व्यवस्था भी लागू नहीं होगी। अब जांचें कृषि विभाग की प्रयोगशालाओं की क्षमता और सामान्य प्रक्रिया के अनुसार होंगी।

