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2026-08-10

गोवर्धन, द्वारकेश और धौलपुर फ्रेश घी के नमूने FSSAI मानकों पर खरे नहीं उतरे

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच ने बाजार में बिक रहे घी की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग द्वारा लिए गए गोवर्धन प्योर काउ घी, द्वारकेश घी और धौलपुर फ्रेश प्रीमियम क्वालिटी देसी घी के नमूने एफएसएसएआइ के तय मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं।

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अधिकृत प्रयोगशाला रिपोर्ट में तीनों नमूनों में अलग-अलग स्तर पर गड़बड़ियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित कंपनियों और विक्रेताओं पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की तैयारी है।

द्वारकेश घी में मिलावट के संकेत

जांच में द्वारकेश घी के नमूने में बीटा-सिटोस्टेराल की मात्रा 100 ग्राम में 2.38 मिलीग्राम मिली, जबकि शुद्ध घी में इसकी मौजूदगी नहीं होनी चाहिए। इसे वनस्पति तेल या वनस्पति वसा के मिश्रण का संकेत माना जाता है।

इसके अतिरिक्त, बीआर रीडिंग, पोलेंस्के वैल्यू, आयोडीन वैल्यू और सैपोनिफिकेशन वैल्यू भी निर्धारित मानकों से अलग पाई गईं।

गोवर्धन घी में सीसा की अधिकता

गोवर्धन प्योर काउ घी के नमूने में सीसा (लीड) की मात्रा ने चिंता बढ़ाई है। जांच में सीसा 0.241 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम मिला, जबकि निर्धारित सीमा केवल 0.02 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम है।

यह दर्शाता है कि सीसे की मात्रा करीब 12 गुना अधिक पाई गई। साथ ही, फैटी एसिड प्रोफाइल और आयोडीन वैल्यू में भी बदलाव मिला।

रक्षाबंधन से पहले मिलावटखोरों का भंडाफोड़ हुआ, जिसमें 25 क्विंटल घी, पनीर और मावा जब्त किया गया। यह भोपाल खाद्य विभाग की एक बड़ी कार्रवाई थी।

धौलपुर फ्रेश घी में तिल के तेल और सीसा की मिलावट

धौलपुर फ्रेश प्रीमियम क्वालिटी देसी घी के नमूने में बाडाइन टेस्ट पॉजिटिव आया, जबकि शुद्ध घी में यह नेगेटिव होना चाहिए। यह तिल के तेल की मौजूदगी का संकेत देता है।

वहीं, इसमें सीसे की मात्रा 0.296 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम मिली, जो तय सीमा से करीब 14.8 गुना अधिक है।