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2026-08-14

भोपाल में पुलिस आरक्षक का अपहरण कर रातभर मारपीट

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में शाहपुरा इलाके में चेकिंग के दौरान दो बदमाशों ने शाहपुरा थाने के आरक्षक सुंदरराम पटेल का अपहरण कर लिया। बदमाशों ने आरक्षक के हाथ-पैर और मुंह बांधकर उसे कार में डाल दिया और रातभर शहर में घुमा-घुमाकर बेरहमी से पिटाई की। यह घटना 7-8 अगस्त की दरमियानी देर रात की है।

आरक्षक सुंदरराम पटेल अपने साथी के साथ गश्त पर थे, तभी उन्होंने संदेह होने पर एक कार को रोका और आरोपियों को थाने चलने को कहा। साथी आरक्षक बाइक लेकर आगे निकल गया, जबकि सुंदरराम पटेल कार में सवार हो गए। मौका मिलते ही बदमाशों ने आरक्षक को दबोच लिया, उसका मोबाइल छीनकर स्विच ऑफ कर दिया और हाथ-पैर बांधकर मारपीट शुरू कर दी।

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जब आरक्षक सुंदरराम थाने नहीं पहुंचे और उनका फोन स्विच ऑफ मिला, तब कंट्रोल रूम के जरिए पूरे भोपाल में अलर्ट जारी किया गया। आरक्षक के पास मौजूद वायरलेस सेट पर चेकिंग और नाकाबंदी के संदेश गूंजने पर बौखलाए बदमाशों ने उसके साथ दोबारा मारपीट की। तड़के पुलिस तंत्र के सक्रिय होने पर आरोपी आरक्षक को एमपी नगर स्थित शासकीय मुद्रणालय के पास फेंककर उसका मोबाइल लूटकर फरार हो गए।

पुलिस कार्रवाई और जांच

पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों और कार के नंबर के आधार पर संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। बदमाशों में से एक विदिशा जिले के गंजबासौदा का निवासी बताया जा रहा है, जबकि दूसरा भोपाल में ही रहता है। जिस कार का इस्तेमाल वारदात में हुआ, वह एक वकील के नाम पर रजिस्टर्ड बताई जा रही है, और पुलिस यह जांच कर रही है कि कार चोरी की थी या नहीं। आरोपियों के खिलाफ अपहरण और लूट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

विभागीय रवैये पर सवाल

इस सनसनीखेज वारदात से भी ज्यादा हैरान करने वाला रवैया पुलिस के आला अधिकारियों का रहा, जिन्होंने महकमे की इतनी बड़ी नाकामी और पुलिस की फजीहत को छिपाने के लिए मामले पर पर्दा डालने की पूरी कोशिश की। चर्चा है कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने मातहत कर्मचारियों को उनके परिजनों की कसम दिलाकर यह हिदायत दी कि यह खबर किसी भी कीमत पर जनता के बीच नहीं पहुंचनी चाहिए।

इस घटना ने भोपाल पुलिस की मुस्तैदी और इकबाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि आम जनता की सुरक्षा करने वाली पुलिस खुद अपने ही कर्मचारियों की सुरक्षा करने में नाकाम साबित हो रही है। वहीं, मामले को दबाने के लिए कसम दिलाए जाने के आरोपों ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।