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2026-10-17

भोपाल में दो बड़े मामलों पर आज सुनवाई

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

भोपाल में मंगलवार को दो महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई निर्धारित है। इनमें रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों से संबंधित 62,500 प्रतिष्ठानों का मामला सुप्रीम कोर्ट में सुना जाएगा। वहीं, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में बड़ा तालाब और कलियासोत डैम के पूर्ण जलस्तर (एफटीएल) क्षेत्र में किए गए पांच दिवसीय सर्वे की रिपोर्ट पेश की जाएगी।

इन दोनों मामलों में न्यायालयों के आगामी निर्देश महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

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रहवासी क्षेत्रों के 62,500 प्रतिष्ठानों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों और अवैध निर्माण से जुड़े इस मामले में सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करेगा। इस मामले में लगभग 62,500 प्रतिष्ठान सूचीबद्ध हैं।

नगर निगम ने अपनी अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट अदालत में दाखिल कर दी है। दूसरी ओर, रहवासियों ने निगम की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए अपने दस्तावेज पेश किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त के आदेश के बाद नगर निगम ने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी करना शुरू किया था। लगभग 15 दिन चली इस कार्रवाई के दौरान, 62,500 प्रतिष्ठानों में से 8084 को नोटिस दिए गए।

इसके बाद तीन दिनों तक चली कार्रवाई में 190 प्रतिष्ठानों को बंद किया गया।

व्यापारियों के विरोध के बाद रुकी सीलिंग

नोटिस और सीलिंग के विरोध में भोपाल के व्यापारियों ने प्रदर्शन किया था। इस विरोध के बाद नगर निगम ने अपनी कार्रवाई रोक दी थी।

पिछले लगभग 15 दिनों से सीलिंग और प्रतिष्ठान बंद करने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है। अब व्यापारियों के साथ-साथ रहवासियों की नजर भी सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी है।

रहवासियों का आरोप है कि निगम ने सभी क्षेत्रों में समान कार्रवाई नहीं की। उन्होंने यह भी दावा किया है कि कार्रवाई के बाद कुछ प्रतिष्ठान दोबारा खुल गए।

याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने नगर निगम की एक्शन टेकन रिपोर्ट पर आपत्ति दर्ज कराई है। रहवासियों की ओर से ऐसे दस्तावेज पेश किए गए हैं, जिनके आधार पर सीलिंग के बाद कुछ प्रतिष्ठानों के दोबारा संचालन का दावा किया गया है।

अरेरा कॉलोनी से उठा था मामला

रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों का मुद्दा अरेरा कॉलोनी से प्रमुखता से सामने आया था। यहां के रहवासियों ने बड़े मॉल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर आपत्ति जताई थी।

उनका कहना है कि आवासीय इलाकों में कारोबार बढ़ने से शोर, भीड़ और यातायात का दबाव बढ़ रहा है। स्कूली बच्चों की सुरक्षा और सड़क हादसों के खतरे को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है।

अगस्त के पहले सप्ताह में मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। साथ ही, दुकान संचालकों को उच्च न्यायालय से मिले राहत संबंधी आदेशों को भी निरस्त कर दिया था।

इसके बाद नगर निगम ने अपनी कार्रवाई शुरू की और अब उसकी रिपोर्ट अदालत के समक्ष है।

बड़ा तालाब-कलियासोत की सीमा पर एनजीटी में खुलेगी सर्वे रिपोर्ट

दूसरी महत्वपूर्ण सुनवाई बड़ा तालाब और कलियासोत डैम के जलभराव क्षेत्र से संबंधित है, जो राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में होगी।

एनजीटी के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने 5 से 9 सितंबर तक पांच दिनों तक ग्राउंड ट्रुथिंग की। इस दौरान ड्रोन से भी निगरानी की गई थी।

सर्वे में एफटीएल क्षेत्र के भीतर या उसके बेहद करीब सड़क, फार्म हाउस, रेस्टोरेंट और अन्य निर्माण पाए जाने की जानकारी सामने आई है।

कई जगहों पर पानी की सीमा मुनार (सीमा चिन्ह) से लगभग 5 से 10 फीट आगे तक पहुंची हुई मिली। कुछ स्थानों पर एफटीएल और ग्रीन बेल्ट के मुनारे मौके पर दिखाई नहीं दिए।

एफटीएल के अंदर सड़क, फार्म हाउस तक पहुंच

सर्वे के दौरान फार्म हाउस तक जाने वाली सड़क तालाब के वेटलैंड क्षेत्र से होकर गुजरती हुई मिली। यह सड़क एफटीएल क्षेत्र में स्थित दो मुनारों के बीच से फार्म हाउस तक जाती हुई पाई गई।

इसके अलावा, तालाब क्षेत्र के अंदर मकान, एफटीएल से लगा ऑटोमोबाइल यार्ड और तालाब के नजदीक रेस्टोरेंट निर्माण से जुड़ी जानकारी भी सर्वे में सामने आई।

खानूगांव, हलालपुरा और ग्राम खुदागंज सहित कई क्षेत्रों में रेस्टोरेंट और अन्य निर्माण पानी की सीमा के बेहद करीब पाए गए।

कलियासोत तालाब के जलभराव क्षेत्र के अंदर से सड़क मिलने की जानकारी भी सामने आई है। सर्वे में कुछ जगहों पर प्लॉटिंग के लिए मुनारे लगाए जाने और प्राकृतिक जल प्रवाह प्रभावित होने की बात भी दर्ज की गई है।

केरवा डैम पर भी आज दिशा तय हो सकती है

टीम को केरवा डैम क्षेत्र का भी सर्वे करना था, लेकिन वहां एफटीएल पर पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण ग्राउंड ट्रुथिंग नहीं हो सकी।

अब एनजीटी की सुनवाई में केरवा क्षेत्र में आगे के सर्वे और जांच की प्रक्रिया को लेकर दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं।

भदभदा के गेट खोलने के बाद बढ़ा था विवाद

बड़ा तालाब के एफटीएल क्षेत्र में अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए एनजीटी ने विशेष सर्वे के निर्देश दिए थे। इससे पहले 4 सितंबर को भदभदा डैम के गेट खोलने को लेकर भी सवाल उठे थे।

एनजीटी ने बड़ा तालाब का पानी 1666.80 फीट पर बनाए रखने और स्थिति स्पष्ट होने तक गेट नहीं खोलने के निर्देश दिए थे।