बुलंद सोच, दतिया।
दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूरी जिला कार्यकारिणी को भंग करने का निर्णय लिया है। इसके बाद पूर्व विधायक अवधेश नायक का बयान सामने आया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट साझा करते हुए पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा पर निशाना साधा है। अवधेश नायक ने संगठन की इस कार्रवाई को साथ रहकर भीतरघात करने वालों के लिए एक बड़ा सबक बताया है।
पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा पर आरोप
अवधेश नायक ने अपनी फेसबुक पोस्ट में 2018 के घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए पूर्व गृहमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 2018 में उनके आका ने अपने पुत्र मोह में उन्हें बदनाम किया। नायक ने आरोप लगाया कि इसी खुन्नस में पूरे पांच साल तक इंदौर में उनके खिलाफ केस दर्ज करवाया गया। उन्होंने यह भी बताया कि जब भाजपा संगठन ने सबूत मांगे, तो पूर्व गृहमंत्री एक भी प्रमाण पेश नहीं कर पाए। नायक ने आगे कहा कि उनके द्वारा पहनाई गई माला को उतारकर फेंक दिया गया था और शायरी सुनाकर उन्हें सार्वजनिक रूप से लांछित किया गया था। अवधेश नायक ने कहा कि पूर्व गृहमंत्री ने हिसाब चुकता कर लिया था, और 2008 में उनका टिकट काटे जाने का जो दर्द उन्हें दिया गया था, भाजपा ने उपचुनाव में उसका ‘1000 गुना दर्द’ उन्हें वापस लौटा दिया है।
संगठन की कार्रवाई और दतिया की जनता से अपील
भाजपा प्रदेश कार्यालय द्वारा दतिया जिला भाजपा कार्यकारिणी को तुरंत प्रभाव से भंग किए जाने के निर्णय पर अवधेश नायक ने कहा कि आज जो संगठनात्मक कार्रवाई हुई है, वह उन लोगों के लिए कड़ा सबक है जो पार्टी में साथ रहकर भीतरघात करते हैं। उन्होंने कहा कि दतिया के सभी लोग अपने हैं, इसलिए उन्हें व्यक्तिगत रूप से संगठन की इस कार्रवाई पर खुशी नहीं हुई। पोस्ट के अंत में अवधेश नायक ने दतिया के लोगों से आपसी रिश्ते बनाए रखने की अपील करते हुए लिखा कि निजी नाते-रिश्तों का सदैव ध्यान रखा करो। उन्होंने कहा कि ‘हम दतिया में जन्मे हैं और यहीं मरेंगे। सबको जय माई की।’।
राजनीतिक हलचल
दतिया उपचुनाव के नतीजों के बाद कार्यकारिणी भंग होने और अवधेश नायक के इस खुले बयान के बाद जिले की राजनीति में भारी भूचाल आ गया है और आने वाले दिनों में जुबानी जंग और तेज होने की संभावना है। दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत का आधार एक मजबूत नैरेटिव बना, जिसमें पूरी ताकत झोंकने के बावजूद भी ‘सादगी सत्ता से आगे’ रही।

