बुलंद सोच, ग्वालियर।
दतिया विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में पराजय के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सामने दतिया में नए सिरे से संगठन की संरचना और जिलाध्यक्ष का चयन एक बड़ी चुनौती बन गया है। पार्टी का उद्देश्य एक ऐसा “नरोत्तम मुक्त जिला दतिया” बनाना है, जहां संगठन को पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव के सामने मजबूती के साथ खड़ा किया जा सके। भाजपा एक प्रभावशाली चेहरे की तलाश कर रही है, जिसे दतिया जिलाध्यक्ष की कमान सौंपी जा सके, ताकि वह संगठन को मजबूत कर सके।
जिलाध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार
वरिष्ठ भाजपा नेता आशुतोष तिवारी का नाम संगठन को नए सिरे से खड़ा करने के लिए सबसे आगे चल रहा है। प्रदेश नेतृत्व आशुतोष तिवारी को दतिया जिले में प्रभावी भूमिका देकर संगठन को नई दिशा देने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। तिवारी अंचल में संभागीय संगठन दायित्व संभाल चुके हैं और उन्हें बूथ स्तर तक संगठन तथा कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का अनुभव है। माना जा रहा है कि उन्हें ऐसी जिम्मेदारी दी जा सकती है, जिससे वे जिले में संगठन को मजबूत करने और नए नेतृत्व को तैयार करने का काम कर सकें। जिलाध्यक्ष पद के लिए दूसरा प्रमुख नाम पूर्व विधायक घनश्याम पिरौनिया का है। पिरौनिया अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित भांडेर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और संगठन तथा क्षेत्रीय राजनीति दोनों में सक्रिय रहे हैं। दतिया विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित वर्ग के मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 23.8 प्रतिशत है, जो चुनाव की दृष्टि से निर्णायक भूमिका में है। अनुसूचित वर्ग को साधने के लिए घनश्याम पिरौनिया की प्रभावी भूमिका हो सकती है, जिससे वे मजबूत दावेदार साबित हो सकते हैं। बसपा के विकल्प के रूप में अनुसूचित वर्ग की राजनीति करने वाले राजनीतिक दल आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार दामोदर यादव को भी 23 हजार वोट हासिल हुए थे।
नरोत्तम मिश्रा समर्थकों पर कार्रवाई
दतिया उपचुनाव के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा समर्थकों पर शुरू हुई संगठनात्मक कार्रवाई ने भी पार्टी के भीतर हलचल बढ़ा दी है। कई नेता भोपाल और दिल्ली में वरिष्ठ नेतृत्व से लगातार संपर्क कर रहे हैं, ताकि समर्थकों के खिलाफ प्रस्तावित अनुशासनात्मक कार्रवाई को रोका जा सके। दूसरी तरफ, मिश्रा भी अपने समर्थकों को आगे होने वाली कार्रवाइयों से बचाने के लिए भोपाल व दिल्ली में नेताओं के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं। हालांकि, प्रदेश नेतृत्व इस बार संगठनात्मक अनुशासन और जवाबदेही के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाए हुए है।
दतिया का राजनीतिक महत्व
भाजपा के लिए दतिया केवल एक जिला नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। इसलिए उपचुनाव की हार के बाद यहां होने वाला संगठनात्मक पुनर्गठन भविष्य की चुनावी रणनीति की दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि नई जिला टीम गुटीय राजनीति से ऊपर उठकर संगठन को मजबूत करे और कार्यकर्ताओं का विश्वास दोबारा हासिल करे। ऐसे में जिलाध्यक्ष की नियुक्ति और संगठन में होने वाले बदलाव आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश भाजपा की राजनीति का महत्वपूर्ण घटनाक्रम साबित हो सकते हैं।

