बुलंद सोच, भोपाल।
प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 में दस्तावेज सत्यापन के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग की एक शर्त पूरी चयन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। कर्मचारी चयन मंडल ने भर्ती अधिसूचना जारी करते समय नियमावली में स्पष्ट किया था कि डीएलएड और बीएलएड के अंतिम वर्ष में अध्ययनरत अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकते हैं।
शर्त यह थी कि उन्हें दस्तावेज परीक्षण के समय शैक्षिक योग्यता के दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। हजारों छात्रों ने इसके तहत आवेदन किया और परीक्षा दी, जिसमें से 800 अभ्यर्थियों का चयन भी हो गया।
हालांकि, अब जब ये अभ्यर्थी दस्तावेजों का सत्यापन कराने पहुंचे हैं, तो स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी उनसे भर्ती प्रक्रिया की अधिसूचना जारी होने के ठीक पहले तक की डिग्री की मांग कर रहे हैं। विभाग उनकी बात नहीं सुन रहा है, जिसके बाद अभ्यर्थी न्यायालय जाने की तैयारी में हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह पूरी प्रक्रिया खटाई में पड़ सकती है।
अभ्यर्थी शुक्रवार को लोक शिक्षण संचालनालय के सामने प्रदर्शन करने पहुंचेंगे और उनकी मांग है कि उन्हें भी दस्तावेज सत्यापन में शामिल होने का मौका दिया जाए।
नियमों में बदलाव पर सवाल
दस्तावेज सत्यापन 18 जुलाई से शुरू हुआ था, जिसमें कई अभ्यर्थियों को यह कहते हुए रोक दिया गया कि आवेदन की अंतिम तिथि 25 अगस्त 2025 तक उनकी अंतिम वर्ष की डिग्री या अंकसूची उपलब्ध नहीं थी। अभ्यर्थियों का कहना है कि आवेदन फार्म के क्लॉज-49 में अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई थी। इसमें केवल इतनी शर्त थी कि दस्तावेज सत्यापन तक अंतिम वर्ष की अंकसूची या उपाधि उपलब्ध हो।
ईएसबी की नियम पुस्तिका के अध्याय-1 के क्लॉज-3 में आवेदन फार्म को भर्ती नियमों का हिस्सा माना गया है। इसके बावजूद, स्कूल शिक्षा विभाग ने 17 जुलाई को जारी आदेश के क्लॉज-9.3 में आवेदन की अंतिम तिथि तक डिग्री पूरी होना अनिवार्य कर दिया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती शुरू होने के बाद नई पात्रता शर्त लागू करना नियमों के विपरीत है।
आयुक्त का बयान
लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह ने कहा कि अगर नियमावली में बदलाव किया गया है, तो अभ्यर्थियों के आवेदन मिलने पर विचार किया जाएगा।

