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2026-08-10

धार के ग्राम देवरा का 900 वर्ष पुराना शिव मंदिर संरक्षण से वंचित

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, धार।

धार जिले के मनावर नगर से लगभग 15 किलोमीटर दूर ग्राम देवरा में नदी किनारे स्थित परमारकालीन प्राचीन शिव मंदिर आज भी अपने गौरवशाली इतिहास की मौन गाथा सुनाता है। यह लगभग 900 वर्ष पुराना मंदिर धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक महत्व और प्राचीन स्थापत्य कला का अद्भुत संगम है। हालांकि, यह प्राचीन धरोहर वर्तमान में उपेक्षा और बदहाली से जूझ रही है।

यह मंदिर पुरातत्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज है और इसका सर्वेक्षण 28 अगस्त 2024 को पूरा हो चुका है। इसके बावजूद इसके संरक्षण और जीर्णोद्धार की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल धरातल पर दिखाई नहीं दी है।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि सर्वेक्षण के समय यह उम्मीद जगी थी कि मंदिर को सुरक्षित कर इसका वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण किया जाएगा। लगभग दो वर्ष बीतने के बाद भी परिसर में न तो सुरक्षा व्यवस्था की गई है और न ही स्थायी सूचना बोर्ड लगाया गया है। विभाग द्वारा लगाया गया अस्थायी फ्लेक्स बोर्ड भी समय के साथ क्षतिग्रस्त हो चुका है। ऐसे में प्राचीन मूर्तियों, शिलाखंडों और अन्य पुरातात्विक अवशेषों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है।

ऐतिहासिक महत्व और जनश्रुतियाँ

देवरा का यह शिव मंदिर परमारकालीन स्थापत्य का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। जनश्रुतियों के अनुसार, कभी इसका विशाल शिखर इतना ऊंचा था कि उसकी छवि मांडू क्षेत्र से भी दिखाई देती थी। हालांकि, इस ऐतिहासिक मान्यता की आधिकारिक पुष्टि पुरातत्व विभाग द्वारा अभी शेष है। यह भी कहा जाता है कि मांडू से मंदिर के शिखर को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था, जिसके बाद यह भव्य मंदिर धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता चला गया। आज भी परिसर में विशाल शिवलिंग, जलाधारी, प्राचीन मूर्तियां और स्थापत्य के अनेक अवशेष इसकी समृद्ध विरासत के साक्षी बने हुए हैं।

संरक्षण संबंधी पहल और आस्था का केंद्र

कुछ वर्ष पहले पुरातत्व विभाग ने मंदिर परिसर में सफाई अभियान चलाकर मलबे के नीचे दबे प्राचीन शिवलिंग और अन्य पुरातात्विक अवशेषों को बाहर निकाला था। इसके बाद मंदिर के संरक्षण को लेकर लोगों में नई उम्मीद जगी थी। 6 दिसंबर 2022 को पुरातत्व आयुक्त स्तर से भी संरक्षण संबंधी पत्र जारी हुआ था, लेकिन इसके बाद भी कार्ययोजना आगे नहीं बढ़ सकी।

यह मंदिर केवल ऐतिहासिक धरोहर ही नहीं, बल्कि गहरी धार्मिक आस्था का भी केंद्र है। बालीपुर धाम के ब्रह्मलीन संतश्री गजाननजी महाराज ने यहां दर्शन-पूजन कर श्रद्धालुओं को इस स्थल की महिमा से परिचित कराया था। तभी से विशेष रूप से श्रावण मास और महाशिवरात्रि पर यहां श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है। नर्मदा तट से कांवड़ में जल लाकर भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। कुछ समय पूर्व राजगढ़ जिले के सिर्वी समाज के बर्फा परिवार द्वारा शिवलिंग पर 18 किलो वजनी पंचमुखी तांबे का नाग अर्पित किया गया, जिसे श्रद्धा का एक अनूठा उदाहरण माना जाता है।

क्षेत्रवासियों की मांगें

क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि मंदिर का वैज्ञानिक संरक्षण कर यहां मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएं, तो यह स्थल धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ इतिहास प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन सकता है। उनकी मांग है कि मंदिर परिसर में स्थायी सूचना बोर्ड लगाया जाए, चौकीदार की नियुक्ति हो, बिखरे हुए प्राचीन अवशेषों को सुरक्षित किया जाए तथा विशेषज्ञों की देखरेख में जीर्णोद्धार की विस्तृत कार्ययोजना बनाकर शीघ्र अमल में लाई जाए।