बुलंद सोच, इंदौर।
इंदौर शहर में भूमिगत मेट्रो के लिए सुरंग बनाने का कार्य शीघ्र ही प्रारंभ होगा। एयरपोर्ट स्थित मेट्रो स्टेशन परिसर से दो टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम), जिन्हें ‘क्षिप्रा’ और ‘नर्मदा’ नाम दिया गया है, के माध्यम से जमीन से 22 मीटर की गहराई में दो सुरंगों का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। ये टीबीएम सबसे पहले एयरपोर्ट से बीएसएफ परिसर के भूमिगत मेट्रो स्टेशन के बीच सुरंग का निर्माण करेंगी।
वर्तमान में एक टनल बोरिंग मशीन इंदौर पहुंच चुकी है। इसे अगले 10 दिन में एयरपोर्ट भूमिगत मेट्रो स्टेशन परिसर में 28 मीटर गहराई में बने गड्ढे में उतारा जाएगा। वहीं, दूसरी टनल बोरिंग मशीन के भी सितंबर तक इंदौर पहुंचने की संभावना है।
शनिवार को मेट्रो के प्रबंध संचालक (एमडी) एस. कृष्ण चैतन्य ने टनल बोरिंग मशीन का निरीक्षण किया और निर्माण एजेंसी के अधिकारियों के साथ भूमिगत सुरंग बनाने के संबंध में चर्चा की।
इंदौर मेट्रो परियोजना का विवरण
इंदौर में यलो लाइन मेट्रो की कुल लंबाई 31.76 किलोमीटर प्रस्तावित है, जिसमें मेट्रो की रिंग का निर्माण शामिल है। इस परियोजना में गांधी नगर स्टेशन से बंगाली चौराहे तक का 19.04 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड है। जबकि, एयरपोर्ट से बंगाली चौराहा तक का 12.72 किलोमीटर हिस्सा भूमिगत है।
भूमिगत मेट्रो स्टेशनों का निर्माण ‘कट एंड कवर’ (ऊपर से खुदाई कर निर्माण) पद्धति के तहत ‘बॉटम-अप’ (नीचे से ऊपर की ओर निर्माण) तरीके से किया जा रहा है। मेट्रो की सुरंगों के निर्माण के लिए टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का उपयोग किया जाएगा।
मिक्स्ड फेस शील्ड टीबीएम से जमीन के नीचे 18 से 22 मीटर की गहराई में सुरंगें बनेंगी। छोटा गणपति भूमिगत मेट्रो स्टेशन के पास सुरंग 28 मीटर की गहराई में बनेगी। सुरंग का व्यास लगभग 5.8 मीटर होगा। टीबीएम मिट्टी को काटते हुए आगे बढ़ेगी और साथ ही सुरंग के भीतर सीमेंट-कंक्रीट की स्थायी प्रीकास्ट आरसीसी रिंग बनाएगी।
सुरक्षा और तकनीकी उपाय
टीबीएम से सुरंग निर्माण के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि जमीन के ऊपर रहने वाले आमजन, भवनों और अन्य संरचनाएं सुरक्षित रहें। सतह पर स्थित भवनों को किसी प्रकार की क्षति की आशंका को न्यूनतम करने के लिए व्यापक सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं।
सुरंग निर्माण क्षेत्र के आसपास लगभग 30 मीटर के दायरे में आने वाले भवनों का भवन स्थिति सर्वेक्षण भवन मालिकों की उपस्थिति में किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, जमीन और भवनों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के लिए विस्तृत उपकरण निगरानी प्रणाली तैयार की गई है।
लगाए जाने वाले सेंसर जमीन अथवा भवनों में होने वाले अत्यंत मामूली बदलाव की भी जानकारी विशेषज्ञों को उपलब्ध कराएंगे, ताकि आवश्यकता होने पर समय रहते उचित सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके।
टीबीएम में किसी भी अप्रत्याशित भूगर्भीय परिस्थिति से सुरक्षित एवं प्रभावी ढंग से निपटने के लिए कई अंतर्निर्मित सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध हैं। मशीन में गैर-ज्वलनशील एवं अग्निरोधी सामग्री का उपयोग किया गया है। इसके अलावा टीबीएम में स्वचालित गैस पहचान सेंसर लगाए गए हैं।
सुरंग में ऑक्सीजन, तापमान एवं आर्द्रता का निर्धारित स्तर बनाए रखने के लिए बाहरी बलपूर्वक वेंटिलेशन प्रणाली की व्यवस्था की गई है। सुरंग में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा के लिए हाइपरबैरिक चैंबर एवं आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाएं भी स्थापित की जा रही हैं।
मेट्रो के वाणिज्यिक परिचालन की तैयारी
मेट्रो प्रबंधन द्वारा सुपर कॉरिडोर से रेडिसन चौराहे तक वाणिज्यिक परिचालन की तैयारी शुरू कर दी गई है। कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी द्वारा अगले एक सप्ताह में अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी कर दिया जाएगा। यह दूसरी बार जारी होने वाला एनओसी होगा।
ऐसे में अगस्त माह के अंत तक मेट्रो का वाणिज्यिक परिचालन शुरू किया जाएगा। शनिवार को मेट्रो के प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य ने मेट्रो में बैठकर सुपर कॉरिडोर से रेडिसन चौराहे तक हुए मेट्रो कार्य का निरीक्षण किया।
प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य ने कहा कि इंदौर मेट्रो शहरवासियों के लिए एक आधुनिक और विश्वस्तरीय सार्वजनिक परिवहन साधन है। उन्होंने बताया कि परियोजना को निर्धारित समय-सीमा में तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आगे बढ़ाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यात्रियों की सुविधा के साथ-साथ सुरक्षा के सभी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कानूनी स्थिति
इंदौर में अंडरग्राउंड मेट्रो का काम जारी रहेगा और फिलहाल इस पर कोई रोक नहीं है। हाई कोर्ट में अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 जून को होगी।

