बुलंद सोच, कोच्चि।
केरल हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर हमले के मामले में चार और आरोपियों को जमानत दे दी है। यह हमला मई 2026 में उस समय हुआ था, जब ईडी की टीम पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के आवास पर तलाशी अभियान पूरा कर लौट रही थी। बुधवार को न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ की एकल पीठ ने निदिन राज, शाहिन, विजय एस.एल. और शैजू सलीम को जमानत देने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के अनुसार मामले की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। साथ ही, इन चारों आरोपियों के खिलाफ पहले से किसी गंभीर अपराध का रिकॉर्ड नहीं है और घटना में घायल लोगों को भी गंभीर चोटें नहीं आई थीं। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि केस डायरी देखने पर आरोप काफी गंभीर नजर आते हैं और प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि यह घटना पहले से योजना बनाकर की गई आपराधिक कार्रवाई थी। इस तरह अब तक कुल 18 आरोपियों को जमानत मिल चुकी है; इससे पहले इसी सप्ताह हाईकोर्ट ने इस मामले में 13 अन्य आरोपियों को भी जमानत दी थी, वहीं एक आरोपी को पहले ही निचली अदालत से राहत मिल चुकी थी।
जमानत की सख्त शर्तें
हाईकोर्ट ने प्रत्येक आरोपी को एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो सक्षम जमानतदार पेश करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया। इसके अलावा, अदालत ने कई अन्य शर्तें भी लगाईं, जिनमें जांच में पूरा सहयोग करना होगा। आरोपियों को हर शनिवार सुबह 10 से 11 बजे के बीच जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होना होगा और जरूरत पड़ने पर बुलाए जाने पर भी पेश होना होगा। वे तिरुवनंतपुरम के कैंटोनमेंट पुलिस थाना क्षेत्र में प्रवेश नहीं करेंगे। संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत में 10-10 हजार रुपये जमा कराने होंगे। जमानत के दौरान किसी भी तरह का समान अपराध नहीं करेंगे। गवाहों से संपर्क, उन्हें प्रभावित या धमकाने की कोशिश नहीं करेंगे। ट्रायल कोर्ट की अनुमति के बिना केरल राज्य से बाहर नहीं जाएंगे।
ईडी तलाशी और हमले का संदर्भ
ईडी की यह कार्रवाई पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की बेटी टी. वीणा की कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस और रेत खनन कंपनी कोचिन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) के बीच हुए वित्तीय लेन-देन से जुड़ी जांच के सिलसिले में की गई थी। जांच एजेंसियों का आरोप है कि वर्ष 2017 से 2020 के बीच वीणा और उनकी कंपनी को आईटी और कंसल्टेंसी सेवाओं के नाम पर सीएमआरएल से भुगतान किया गया, जबकि ये सेवाएं वास्तव में दी ही नहीं गईं। हालांकि, टी. वीणा और सीएमआरएल ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि यह पूरी तरह वैध व्यावसायिक लेन-देन था। ईडी के अनुसार, तलाशी पूरी होने के बाद जब अधिकारी लौट रहे थे, तभी भीड़ ने उनके वाहनों पर हमला कर दिया। इस हमले में एक चालक, सीआरपीएफ का एक जवान और तलाशी दल का एक सदस्य घायल हो गया था। एजेंसी ने अदालत में दायर हलफनामे में दावा किया कि यह हमला केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों पर किया गया ‘संगठित, पूर्व नियोजित और राजनीतिक रूप से समन्वित हिंसक हमला’ था, जिसमें खतरनाक हथियारों का भी इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में सुनवाई पूरी होने के बाद ही होगा।

