बुलंद सोच, धनबाद।
झारखंड में लाल आतंक के खिलाफ सुरक्षा बलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। एक करोड़ रुपये के इनामी और कुख्यात माओवादी कमांडर मिसिर बेसरा को गिरफ्तार कर लिया गया है।
उसे मंगलवार शाम झारखंड के धनबाद-गिरिडीह सीमावर्ती इलाके से दबोचा गया।
मिसिर बेसरा के साथ दो सक्रिय माओवादी सदस्य मोछू और सौरभ उर्फ गौरव भी पकड़े गए हैं। इसके अतिरिक्त, दो स्थानीय ग्रामीणों को भी गिरफ्तार किया गया है, जिनसे पुलिस पूछताछ कर रही है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मिसिर बेसरा का पकड़ा जाना माओवादियों के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका है। वह संगठन के कई गहरे राज जानता है।
मिसिर बेसरा का नेटवर्क और आपराधिक मामले
केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा एक करोड़ रुपये का इनामी शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा का प्रभाव झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ चार राज्यों में फैला हुआ था।
उस पर हत्या, पुलिस बल पर हमले, रंगदारी और आईईडी धमाकों के दर्जनों संगीन मामले दर्ज हैं।
वह गिरिडीह जिले के हरलाडीह का रहने वाला है और लंबे समय से सुरक्षा बलों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था।
संगठन में उसकी भूमिका काफी अहम थी। कोल्हान, ंडा और पारसनाथ के इलाकों में उसका गहरा प्रभाव था। वह माओवादी संगठन की नीतियां बनाने और अलग-अलग राज्यों में नेटवर्क चलाने का काम करता था।
माओवादी बनने की कहानी
मिसिर बेसरा की कहानी 1980 के दशक से शुरू होती है। गिरिडीह जिले का रहने वाला यह साधारण लड़का पढ़ाई करने धनबाद आया था।
कॉलेज में उसका मन किताबों से ज्यादा नक्सली विचारधारा और क्रांति की बातों में लगने लगा। उस समय जल, जंगल और जमीन के नाम पर चल रहे आंदोलनों से वह प्रभावित हो गया।
उसने पढ़ाई छोड़ दी और सीधे नक्सलियों के साथ जंगलों में चला गया। मिसिर बेसरा दिमाग का बहुत तेज था और योजनाएं बहुत अच्छी बनाता था, जिस वजह से वह जल्द ही नक्सलियों के बीच एक बड़ा नेता बन गया।
धीरे-धीरे वह माओवादी संगठन की सेंट्रल कमेटी और पोलित ब्यूरो का मुख्य सदस्य बन गया।
मिसिर बेसरा ने गिरिडीह के पारसनाथ, ंडा और कोल्हान के घने जंगलों को अपना अड्डा बना लिया था। झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में नक्सली जो भी बड़ी वारदात करते थे, वह बेसरा के इशारे पर ही होती थी।
वह पुलिस पर हमले करने, आईईडी धमाके कराने और रंगदारी (लेवी) वसूलने का मास्टरमाइंड था। उसका खौफ इतना बढ़ गया था कि सरकारों ने उस पर एक करोड़ रुपये का भारी इनाम घोषित कर दिया। वह वर्षों तक पुलिस की मोस्ट वांटेड सूची में सबसे ऊपर रहा।
गिरफ्तारी की प्रक्रिया
समय के साथ सुरक्षा बलों ने जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिए थे। पिछले कुछ महीनों में मिसिर बेसरा के एक-एक करके लगभग सभी करीबी साथी या तो पुलिस मुठभेड़ में मारे गए या फिर पकड़ लिए गए।
इससे उसका नेटवर्क पूरी तरह टूट गया और इसी का फायदा उठाकर सुरक्षा बलों ने उसे घेरकर गिरफ्तार कर लिया।
जुलाई 2026 में गुप्त सूचना मिलने पर सीआरपीएफ, कोबरा और झारखंड पुलिस ने धनबाद-गिरिडीह सीमा के इलाके को चारों तरफ से घेर लिया।
जो मिसिर बेसरा कभी चार राज्यों के लिए दहशत का नाम था, वह अपने दो नक्सली साथियों और दो ग्रामीणों के साथ घिर गया। बिना एक भी गोली चले, पुलिस ने एक करोड़ के इनामी माओवादी कमांडर को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस उससे लगातार पूछताछ कर रही है। उम्मीद है कि पूछताछ में शीर्ष नेतृत्व, हथियारों की सप्लाई, लेवी वसूली और सुरक्षित ठिकानों को लेकर कई बड़े खुलासे होंगे। पकड़ाए गए ग्रामीणों की भूमिका की भी जांच चल रही है।
इसके साथ ही दशकों से चला आ रहा लाल आतंक का एक बड़ा अध्याय खत्म हो गया।
उसी दिन 16 नक्सलियों का आत्मसमर्पण
मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से ठीक पहले, उसी मंगलवार को 16 नक्सलियों ने झारखंड पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया।
इन आत्मसमर्पण करने वालों में छह नक्सलियों पर 39 लाख रुपये का इनाम था। 128 मामलों में आरोपी और 15 लाख रुपये का इनामी संतोष महतो उर्फ बासुदेव दा भी आत्मसमर्पण करने वालों में शामिल है।

