बुलंद सोच, इंदौर।
इंदौर में अंडरग्राउंड मेट्रो निर्माण का काम अब तेजी से आगे बढ़ेगा। जमीन से लगभग 20 मीटर नीचे मेट्रो ट्रैक बनाने के लिए थाईलैंड से पहली टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) के पुर्जे इंदौर पहुंच चुके हैं।
मशीन को असेंबल करने में लगभग एक से डेढ़ माह का समय लगेगा, जिसके बाद अंडरग्राउंड ट्रैक की खुदाई शुरू होगी।
इंदौर में कुल चार टीबीएम मशीनें लाई जाएंगी, जिनका वजन लगभग एक-एक हजार टन होगा। इन मशीनों की मदद से शहर के अलग-अलग हिस्सों में सुरंग निर्माण का कार्य किया जाएगा।
फिलहाल पहली मशीन एयरपोर्ट क्षेत्र में स्थापित की जा रही है, क्योंकि सबसे पहले इसी अंडरग्राउंड हिस्से को एलिवेटेड ट्रैक से जोड़ा जाएगा।
इंदौर मेट्रो के 17.5 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के बाद अब परियोजना का अगला चरण अंडरग्राउंड ट्रैक निर्माण का है। इसके लिए मेट्रो रेल परियोजना से जुड़ी एजेंसी ने थाईलैंड सहित अन्य देशों से टीबीएम मशीन के पुर्जे मंगवाकर इंदौर में ही उन्हें असेंबल करने का निर्णय लिया है।
पहली मशीन के अधिकांश पुर्जे 11 ट्रॉलों के माध्यम से इंदौर पहुंच चुके हैं और उन्हें जोड़ने का कार्य जारी है।
टीबीएम मशीन की कार्यप्रणाली
मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के जनसंपर्क अधिकारी धीरज शुक्ला ने बताया कि टीबीएम मशीन के अधिकांश पुर्जे इंदौर पहुंच चुके हैं, हालांकि, मशीन का कटर हेड अभी आना बाकी है।
यही हिस्सा चट्टानों और मिट्टी को काटते हुए सुरंग बनाने का मुख्य कार्य करता है।
इंदौर में अंडरग्राउंड मेट्रो ट्रैक का निर्माण टीबीएम मशीनों की सहायता से किया जाएगा। मशीन के अगले हिस्से में लगा विशाल गोलाकार कटर हेड लगातार घूमते हुए मिट्टी और चट्टानों को काटकर सुरंग तैयार करेगा।
खुदाई के दौरान निकलने वाला मलबा कन्वेयर बेल्ट के जरिए मशीन के पीछे तक पहुंचाया जाएगा और वहां से सुरंग के बाहर निकाला जाएगा।
जिन हिस्सों में खुदाई पूरी हो जाएगी, वहां पहले से तैयार कंक्रीट के सेगमेंट (ब्लॉक) लगाए जाएंगे। ये सेगमेंट सुरंग की दीवारों को मजबूती प्रदान करेंगे और मिट्टी धंसने से बचाएंगे, जिससे सुरंग सुरक्षित और स्थायी बनी रहेगी।

