बुलंद सोच, ग्वालियर।
देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन ग्वालियर में स्थापित किया जाएगा। इस संबंध में गुरुवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्र सरकार के दूरसंचार मंत्रालय और मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उपस्थित थे।
केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने इस पहल को ग्वालियर में देश के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की स्थापना को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘विकसित भारत–2047’ के संकल्प को नई गति प्रदान करेगी, साथ ही भारत को वैश्विक दूरसंचार विनिर्माण के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाएगी।
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जानकारी दी कि भारत को दूरसंचार क्षेत्र में सेवा प्रदाता से उत्पादक बनने के लिए एक स्वदेशी औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता है। इस परियोजना के प्रथम चरण के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए केंद्र सरकार ने 500 करोड़ रुपये की शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता स्वीकृत की है।
परियोजना का स्वरूप
यह टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन ग्वालियर में लगभग 350 एकड़ क्षेत्र में ‘प्लग-एंड-प्ले’ मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इस एकीकृत परिसर में मोबाइल फोन, नेटवर्क उपकरण, फाइबर ऑप्टिक्स, सेमीकंडक्टर, तथा 5जी और 6जी तकनीकों के अनुसंधान, डिजाइन, परीक्षण और उत्पादन की अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
निवेश और रोजगार
सिंधिया ने टीएमजेड के दीर्घकालिक लाभों का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके माध्यम से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में लगभग नौ हजार करोड़ रुपये तक का कुल निवेश आएगा। इस निवेश से 10 हजार से अधिक युवाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
परियोजना के प्रथम चरण में ही डिक्सन टेक्नोलॉजीज, एचएफसीएल और तेजस नेटवर्क जैसी देश की अग्रणी कंपनियों द्वारा लगभग दो हजार करोड़ रुपये का प्रारंभिक निवेश किया जा रहा है। इससे चार हजार पांच सौ से अधिक उच्च-वेतन वाले रोजगार सृजित होंगे और अंचल के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे।
विशेष प्रयोजन वाहन का गठन
परियोजना के सुचारु संचालन और क्रियान्वयन के लिए एक विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) का गठन किया जाएगा। इस एसपीवी में मध्य प्रदेश सरकार की 51 प्रतिशत और भारत सरकार के दूरसंचार विभाग की 49 प्रतिशत भागीदारी होगी।
केंद्रीय मंत्री ने इसे सहकारिता का एक बेहतरीन उदाहरण बताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना भारत को दुनिया पर निर्भर रहने के बजाय, दुनिया को भारत पर निर्भर बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगी। उन्होंने कहा कि यह केंद्र व राज्य की साझा परियोजना ग्वालियर को देश के एक प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स एवं दूरसंचार विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।

