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2026-07-31

सीजेपी प्रमुख दीपके ने पीएम मोदी से कहा: ‘कुर्सी छोड़ें, इन्फ्लुएंसर बनें’

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच,

लोकसभा से पारित एंटी-पेपर लीक बिल और देश भर में जारी छात्र प्रदर्शनों के चलते राजनीति गरमा गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। दीपके ने कहा कि बिना सही नीयत और प्रभावी अमल के केवल कानून बना देने से पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान नहीं हो पाएगा। बुधवार को महाराष्ट्र स्थित अपने गृहनगर में पत्रकारों से बात करते हुए अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री के इंस्टाग्राम वीडियो पर तंज कसा। इन वीडियो में प्रधानमंत्री युवाओं को संबोधित करते हुए दिखाई दिए थे। दीपके ने कहा, “मुझे लगता है कि पीएम मोदी को इन्फ्लुएंसर बन जाना चाहिए। वह इस काम को बहुत अच्छी तरह कर रहे हैं। अगर वह इतने ही बेहतरीन इन्फ्लुएंसर हैं, तो उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़ देनी चाहिए। किसी और को प्रधानमंत्री का काम करने देना चाहिए।” इससे पहले मंगलवार को कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी संसद में प्रधानमंत्री के इंस्टाग्राम वीडियो पर टिप्पणी की थी। प्रियंका ने कहा था कि सिर्फ नए-नए एंगल से वीडियो बनाकर जेन-जी युवाओं का समर्थन हासिल नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री को कैमरे का एंगल बदलने के बजाय अपने दिल का कोण बदलना होगा।

एंटी-पेपर लीक बिल पर सवाल

लोकसभा में पारित एंटी-पेपर लीक बिल पर समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए दीपके ने कानून की उपयोगिता पर सवाल खड़े किए। दीपके ने कहा कि देश में बिल आते रहेंगे और कई अच्छे कानून पहले भी बने हैं, लेकिन जब तक इसे लागू करने वालों की नीयत साफ नहीं होगी, कुछ नहीं होने वाला। उन्होंने बताया कि तीन दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का वादा किया था, जिस पर लोगों ने खुशी जताई थी। दीपके ने खुलासा किया कि पेपर लीक मामले की पहली ही सुनवाई स्थगित हो गई, क्योंकि सीबीआई के वकील कोर्ट में हाजिर ही नहीं हुए। उन्होंने कहा कि जब लागू करने वाले लोग ही गंभीर नहीं हैं, तो ऐसे कानूनों का क्या मतलब रह जाता है?

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छात्र आंदोलन और सरकारी वादे

नीट पेपर लीक और छात्र खुदकुशी के विरोध में 20 जुलाई को हजारों छात्रों ने सीजेपी के नेतृत्व में संसद की ओर पैदल मार्च निकाला था। इस आंदोलन के दौरान पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया, पेलेट गन चलाई और कई छात्रों को हिरासत में लेकर एफआईआर दर्ज की। छात्रों के भारी दबाव के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 25 जुलाई को सरकार और सीजेपी के बीच सहमति बनी थी। सरकार ने एफआईआर वापस लेने, नए केस दर्ज न करने और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने का लिखित भरोसा दिया था। हालांकि, सीजेपी नेता सौरव दास का कहना है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिखाया, लेकिन एफआईआर रद्द करने का कोई लिखित आश्वासन अभी तक नहीं दिया है। सीजेपी का आरोप है कि समझौते के बाद भी पुलिस छात्रों को चिन्हित करके परेशान और प्रताड़ित कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा एफआईआर पर जांच जारी रखने की अनुमति दी है, जिसे सीजेपी सरकार के वादों के बिल्कुल खिलाफ बताती है। सीजेपी नेता रांका ने राकेश टिकैत की मौजूदगी में किसान मोर्चा के कार्यक्रम में कहा कि किसानों, छात्रों और युवाओं को एक साथ मिलकर मोदी सरकार को घेरना होगा। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए आपातकाल दौर का हवाला दिया था। इस पर सीजेपी ने पूछा कि क्या 50 वर्षों में कुछ भी नहीं बदला? दीपके ने साफ कहा कि अगर प्रताड़ना बंद नहीं हुई, तो धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से गुस्सा शांत नहीं होगा और अगला आंदोलन पहले से भी ज्यादा बड़ा होगा।

चुनावी चेतावनी और अन्य टिप्पणियां

दीपके ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह केवल वोटों की भाषा समझते हैं। उन्होंने कहा, “हर छात्र के घर में कम से कम चार वोट होते हैं। अगर एक छात्र पर लाठी चलती है या पेलेट गन दागी जाती है, तो उस घर के चार वोट सरकार के खाते से कम हो जाएंगे। अगर समय रहते सरकार ने सुधार नहीं किया, तो आने वाले चुनावों में छात्र खुद उन्हें सही रास्ते पर ले आएंगे।” भाजपा सांसद कंगना रनौत के जेन-जी पीढ़ी को “गटर जनरेशन” कहने वाले बयान पर पूछे जाने पर दीपके ने सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया। दीपके ने कहा, “कंगना रनौत आखिरी बार संसद में कब दिखी थीं? अगर कोई गंभीर राजनेता टिप्पणी करे तो मुझे बताएं। मैं पार्ट-टाइम नेताओं के बयानों पर समय बर्बाद नहीं करता।”