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2026-08-17

भारतीय मूल के केतनकुमार पिपलिया ब्रिटेन के क्लैक्टन-ऑन-सी उपचुनाव में नाइजेल फराज को चुनौती दे रहे

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, क्लैक्टन-ऑन-सी।

भारतीय मूल के उद्यमी और यूके वॉयस पार्टी के संस्थापक केतनकुमार पिपलिया ने ब्रिटेन के क्लैक्टन-ऑन-सी संसदीय उपचुनाव में नाइजेल फराज के सामने चुनौती पेश की है। इस चुनाव में कुल 34 उम्मीदवार मैदान में हैं।

सत्तारूढ़ लेबर पार्टी और विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी ने इस चुनाव का बहिष्कार किया है, जिसके कारण यह मुकाबला ब्रिटेन की सामान्य चुनावी राजनीति से काफी अलग बन गया है।

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उपचुनाव की असाधारण प्रकृति

क्लैक्टन-ऑन-सी के इस उपचुनाव में 34 उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से मतपत्र (बैलेट पेपर) असाधारण रूप से लंबा हो गया है।

उम्मीदवारों की सूची में ऐसे कई नाम शामिल हैं, जो आम चुनावी राजनीति में बेहद अलग नजर आते हैं, जैसे ऑफिशियल मॉन्स्टर रेविंग लूनी पार्टी के काउंट बिनफेस और निक द इनक्रेडिबल फ्लाइंग ब्रिक। इस वजह से यह चुनाव ब्रिटेन में खास चर्चा का विषय बन गया है।

केतनकुमार पिपलिया का रुख

फार्मास्यूटिकल क्षेत्र से जुड़े उद्यमी केतनकुमार पिपलिया यूके वॉयस पार्टी के संस्थापक हैं। उनका कहना है कि क्लैक्टन के लोगों को ऐसा सांसद चाहिए जो स्थानीय हितों को सबसे पहले रखे।

वह नियंत्रित सीमाओं, निष्पक्ष आव्रजन व्यवस्था और यूरोप के साथ सहयोग बढ़ाने की वकालत करते हैं। उनकी दावेदारी ऐसे समय में सामने आई है, जब ब्रिटेन में आव्रजन और सीमा नियंत्रण बड़े राजनीतिक मुद्दे बने हुए हैं।

नाइजेल फराज के सामने चुनौती

दक्षिणपंथी रिफॉर्म यूके पार्टी के नेता नाइजेल फराज इस सीट से फिर से चुनाव लड़ रहे हैं। फराज ने बीते महीने सांसद पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद यह उपचुनाव कराया जा रहा है।

लेबर और कंजर्वेटिव पार्टियों ने इस चुनाव का बहिष्कार करते हुए इसे फराज द्वारा कराया गया ‘फर्जी उपचुनाव’ बताया है। ऐसे में फराज को एक तरफ 33 अन्य उम्मीदवारों का सामना करना है और दूसरी तरफ दो प्रमुख दलों के बहिष्कार ने मुकाबले को और असामान्य बना दिया है।

फराज पर लगे वित्तीय आरोप

फराज पर क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े एक अरबपति से 5 मिलियन डॉलर के तोहफे और एक दोषी धोखेबाज से अघोषित चंदे सहित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। हालांकि, फराज ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है।

इन आरोपों की जांच संसदीय मानक निगरानी संस्था कर रही है। ऐसे में क्लैक्टन का चुनाव केवल सीट जीतने की लड़ाई नहीं है, बल्कि फराज के राजनीतिक प्रभाव और भारतीय मूल के केतनकुमार जैसे उम्मीदवारों के लिए अपनी जगह बनाने की परीक्षा भी है।