बुलंद सोच, इंदौर।

अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न हुए ईंधन संकट के दौरान घरेलू गैस सिलेंडर के लिए घबराहट (पैनिक) की स्थिति बन गई थी। इस अवधि में सिलेंडर की थोक बुकिंग हो रही थी। इस वजह से उपभोक्ताओं को सिलेंडर आठ से दस दिन में ही मिल पा रहा था। अब यह पैनिक खत्म हो गया है और सिलेंडर की डिलीवरी दो दिन में हो रही है। सिलेंडर की डिलीवरी को पूरी तरह से ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) आधारित कर दिया गया है। बगैर ओटीपी के सिलेंडर की डिलीवरी नहीं की जा रही है। हालांकि, इसके बावजूद रेस्टोरेंट पर घरेलू गैस सिलेंडर का व्यावसायिक उपयोग दिखाई दे रहा है। ओटीपी आधारित डिलीवरी व्यवस्था से यह सुनिश्चित होता है कि सिलेंडर किसी अन्य को नहीं दिया जाता है। डिलीवरी के लिए ओटीपी जनरेट होने के बाद तीन दिन में सिलेंडर डिलीवर करना अनिवार्य है। ऐसा नहीं होने पर सिस्टम अपने आप तीन दिन में बुकिंग को रद्द कर देता है और उपभोक्ता के खाते में भी सिलेंडर दर्ज नहीं होता है। इसलिए उपभोक्ता दोबारा बुकिंग आसानी से करवा सकता है। ओटीपी केवल रजिस्टर्ड मोबाइल पर आने के कारण वास्तविक उपभोक्ता तक ही सिलेंडर पहुंचता है, जबकि पहले घर पर नहीं मिलने पर अन्य को सिलेंडर बेच दिया जाता था।
वाणिज्यिक गैस की मांग और पीएनजी का प्रभाव
ईंधन संकट के बीच वाणिज्यिक गैस उपभोक्ता सबसे अधिक प्रभावित हुए थे, क्योंकि इनकी आपूर्ति रोक दी गई थी। यह आपूर्ति लंबे समय तक रुकी रही, जिसके कारण कई छोटे रेस्टोरेंट बंद हो गए। वहीं, कई रेस्टोरेंट और होटलों द्वारा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग शुरू कर दिया गया था। वाणिज्यिक गैस सिलेंडर के दाम भी बढ़कर तीन हजार रुपये से अधिक हो गए थे। वर्तमान में 19 किलोग्राम का सिलेंडर 2847 रुपये में मिल रहा है। इस वजह से आपूर्ति सामान्य होने के बावजूद वाणिज्यिक गैस की मांग कुछ कम हुई है। वर्तमान में प्रतिदिन 2500 से तीन हजार वाणिज्यिक सिलेंडरों की खपत है, जबकि पहले 3500 से चार हजार सिलेंडर प्रतिदिन खपत होती थी। ईंधन संकट के दौरान शहर में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) की आपूर्ति सामान्य रही थी। इसकी वजह से पीएनजी के कनेक्शन भी बढ़े हैं। बाजारों में कई रेस्टोरेंट और होटलों को पीएनजी कनेक्शन दिए गए थे। ऐसे में पीएनजी का उपयोग बढ़ने से वाणिज्यिक सिलेंडर की खपत कम हुई है। हालांकि, शादी-विवाह के सीजन में वाणिज्यिक सिलेंडर की खपत बढ़ती है, जो वर्तमान में बंद है।

