बुलंद सोच, इंदौर।
इंदौर अपनी स्वच्छता के प्रति प्रेम के कारण देशभर में एक अलग पहचान बनाए हुए है। शहर के लोग जहां भी जाते हैं, वहां स्वच्छता का संदेश देने का प्रयास करते हैं। इसी सोच के साथ इंदौर के पांच यात्रियों ने कैलास मानसरोवर यात्रा के दौरान भी स्वच्छता का संदेश दिया। उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बीच लोगों को जागरूक किया और यात्रा मार्ग पर फैला कूड़ा-कचरा भी इकट्ठा किया।
कैलास मानसरोवर यात्रा और दल
इंदौर निवासी कमलेश गुप्ता ने 1 से 16 जुलाई तक काठमांडू मार्ग से कैलास मानसरोवर की यात्रा पूरी की। उनकी पत्नी सुषमा गुप्ता और महू के तीन साथी नेहल अग्रवाल, वंशिका अग्रवाल और पीयूषा अग्रवाल भी उनके साथ इस यात्रा में शामिल थे।
तिब्बत क्षेत्र में स्वच्छता संबंधी शिकायतें
कमलेश गुप्ता ने बताया कि तिब्बत क्षेत्र में अक्सर यह शिकायत सुनने को मिलती है कि कुछ भारतीय यात्री यात्रा के दौरान कूड़ा-कचरा फैला देते हैं। इससे भारत की छवि प्रभावित होती है। इसी कारणवश वहां कई तरह की धार्मिक गतिविधियों पर पहले से ही कई सीमाएं लगाई जा चुकी हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए समूह ने यात्रा शुरू होने से पहले स्वच्छता जागरूकता के लिए विशेष बैनर तैयार करवाए थे।
डोलमा ला दर्रे पर विशेष अभियान
कमलेश गुप्ता ने जानकारी दी कि यात्रा के दौरान समूह ने कई स्थानों पर यात्रियों को सफाई के लिए प्रेरित किया। सबसे खास अभियान कैलास परिक्रमा के सबसे ऊंचे स्थान डोलमा ला दर्रे पर चलाया गया। यह स्थान समुद्र तल से 5643 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी के कारण कुछ कदम चलने पर ही सांस फूलने लगती है। आमतौर पर यात्रियों को वहां केवल पांच से दस मिनट रुकने की अनुमति होती है।
एक घंटे तक चला सफाई अभियान
इन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद, समूह ने डोलमा ला दर्रे पर अपना स्वच्छता अभियान का बैनर लगाया और लगभग एक घंटे तक सफाई अभियान चलाया। वहां से गुजर रहे कई भारतीय यात्रियों ने भी इस अभियान में हिस्सा लिया। सभी ने मिलकर रास्ते पर फैला कूड़ा-कचरा इकट्ठा किया। बाद में, स्थानीय लोगों की मदद से एकत्रित कचरे को नीचे बने डस्टबिन तक पहुंचाया गया।

