बुलंद सोच, ग्वालियर।
ग्वालियर जिले में कथित अवैध खनन को लेकर दायर जनहित याचिका पर बुधवार को मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने मामले में कई महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए माइनिंग विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि रिकॉर्ड छिपाया गया या गलत जानकारी दी गई तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ अवमानना के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई हो सकती है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई 6 अगस्त को सुबह 10:30 बजे निर्धारित की है।
याचिकाकर्ता अकरम खान की ओर से बताया गया कि पूर्व में 16 खदानों में खनन पर रोक लगाई गई थी।
आरोप लगाया गया कि प्रतिबंधित खदानों में शामिल उत्तरदाता अशोक सिंह यादव की दो अन्य चालू खदानों का सहारा लेकर प्रतिबंधित क्षेत्र से निकाले गए खनिज को वैध दर्शाया जा रहा है।
कहा गया कि प्रभारी माइनिंग अधिकारी घनश्याम यादव कथित रूप से अन्य संचालित खदानों के नाम पर रॉयल्टी रसीदें जारी कर रहे हैं, जिससे प्रतिबंधित क्षेत्र में खनन जारी है।
इन आरोपों को गंभीर मानते हुए हाई कोर्ट ने प्रभारी माइनिंग अधिकारी घनश्याम यादव को निर्देश दिया कि वे अशोक सिंह यादव की तीनों खदानों का पिछले दो माह का संपूर्ण उत्पादन रिकॉर्ड गुरुवार तक शपथ-पत्र के साथ पेश करें।
कोर्ट ने यह भी कहा कि शपथ-पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाए कि कलेक्टर कार्यालय के माइनिंग सेक्शन में इस रिकॉर्ड के अतिरिक्त कोई अन्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।
यदि बाद में यह पाया गया कि किसी प्रकार की जानकारी जानबूझकर या अनजाने में छिपाई गई है, तो संबंधित अधिकारी अवमानना की कार्रवाई के लिए स्वयं जिम्मेदार होंगे।
सुनवाई के दौरान एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा सीसीटीवी निगरानी से बचने के लिए बनाए गए वैकल्पिक रास्तों का भी उठा।
मामले में निरीक्षण कर रही अधिकारी ने अदालत को बताया कि उन्होंने हाल में स्थल का निरीक्षण नहीं किया है, इसलिए अभी यह नहीं कह सकतीं कि खनन क्षेत्रों से निकलने वाले ट्रकों के लिए कोई नया वैकल्पिक मार्ग बनाया गया है या नहीं। इस पर कोर्ट ने उन्हें उसी दिन स्थल का निरीक्षण करने और अगली सुनवाई में लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
रिपोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि प्रतिबंधित और संचालित दोनों प्रकार की खदानों से निकलने वाले ट्रकों के लिए कौन-कौन से मार्ग उपयोग में हैं।
युगलपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि यह पाया जाता है कि खनिज से भरे ट्रक सीसीटीवी निगरानी से बचने के लिए अनाधिकृत मार्गों से निकाले जा रहे हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी ग्वालियर कलेक्टर की होगी।
कोर्ट ने याद दिलाया कि पहले ही कलेक्टर को इस पूरे मामले की निगरानी अपने स्तर पर करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
राज्य शासन की ओर से अदालत को बताया गया कि बिलौआ थाना क्षेत्र के पास स्थित एमपीआरडीसी टोल प्लाजा का पिछले एक माह का सीसीटीवी डीवीआर सीलबंद लिफाफे में प्राप्त कर लिया गया है।
अदालत ने फिलहाल इस सीलबंद पैकेट को नहीं खोला और अतिरिक्त जानकारी मिलने तक सुरक्षित रखने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर ही इसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
इसी प्रकार भोपाल से प्राप्त खनन संबंधी फाइलें भी सीलबंद अवस्था में न्यायालय के समक्ष होने की जानकारी दी गई।
अदालत ने इन्हें भी फिलहाल सुरक्षित रखने और आवश्यक होने पर ही प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

