बुलंद सोच, मैहर।
जिले के बहेली गांव (ंग ग्राम पंचायत) में वन विभाग की भूमि पर बिरसा मुंडा और डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाएं स्थापित किए जाने को लेकर बुधवार को तनावपूर्ण स्थिति बन गई।
वन विभाग द्वारा कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद लोगों और अधिकारियों के बीच विवाद बढ़ गया तथा पथराव की घटना भी हुई।
इसके बाद प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर स्थिति को नियंत्रित किया।
वन विभाग का पक्ष
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, वन विभाग का कहना है कि संबंधित भूमि आरक्षित वन क्षेत्र है और उस पर बिना अनुमति प्रतिमाएं स्थापित कर कब्जे का प्रयास किया गया था।
विभाग की टीम जब भूमि खाली कराने पहुंची तो विरोध शुरू हो गया।
प्रशासनिक कार्रवाई
हालात बिगड़ने पर एसडीएम दिव्या पटेल, सीएसपी महेंद्र सिंह सहित प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे।
लगभग 300 से अधिक पुलिस और वनकर्मियों की मौजूदगी में कार्रवाई पूरी कराई गई।
कार्रवाई के दौरान स्थापित प्रतिमाओं को हटाकर जब्त किया गया और वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया।
प्रशासन का कहना है कि भूमि को पुनः वन विभाग के कब्जे में लेकर वहां पौधारोपण भी कराया गया है।
क्षेत्र में किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
पूर्व की घटना
यह विवाद नया नहीं है।
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, इसी मामले में 2 जुलाई को भी वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए प्रतिमा हटाई थी और दो लोगों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया था।
उस समय आदिवासी समाज के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर समझाइश देकर मामला शांत कराया गया था।
दोनों पक्षों के विचार
आदिवासी समाज के कुछ लोगों का आरोप है कि वे बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थापित कर अपने महापुरुष का सम्मान करना चाहते थे, जबकि वन विभाग इसे अवैध अतिक्रमण मान रहा है।
दूसरी ओर वन विभाग का स्पष्ट कहना है कि किसी भी आरक्षित वन भूमि पर बिना वैधानिक अनुमति निर्माण या प्रतिमा स्थापना कानून का उल्लंघन है।

