बुलंद सोच, जबलपुर।

जबलपुर में एथनाॅल उत्पादन के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा आवंटित चावल की आपूर्ति में गड़बड़ी सामने आई है। एफसीआई ने शहपुरा के वेयरहाउस से बड़ी मात्रा में चावल एथनाॅल प्लांट के नाम पर उठवाया था, लेकिन पूरा स्टॉक निर्धारित प्लांट तक नहीं पहुंचा।
सूत्रों के अनुसार, यह चावल रास्ते में ही अपने गंतव्य के बजाय दूसरे स्थानों पर खपा दिया गया। इस फर्जीवाड़े में शहर के कुछ राइस मिलरों के साथ ट्रांसपोर्टर भी शामिल हैं। इस पूरे प्रकरण से जुड़े एफसीआई के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।
जब एफसीआई के अधिकारियों से इस बारे में पूछा गया, तो उनका कहना था कि गेट से बाहर जाने के बाद चावल या धान पर उनका कोई अधिकार नहीं होता है। अब एफसीआई के अधिकारी इस मामले को लेकर बच रहे हैं।
संभावना जताई जा रही है कि इस स्टॉक को रिकॉर्ड में परिवहन दिखाकर माल को अन्य राइस मिलों और कुछ को खुले बाजार में बेचा गया। परिवहन से जुड़े दस्तावेज, वेयरहाउस से जारी गेट पास और प्लांट में प्राप्ति के रिकॉर्ड में भी हेरफेर किया गया, जिसका न तो मिलान किया गया और न ही जांच की गई। उल्लेखनीय है कि दो साल पूर्व तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना ने जिले में धान परिवहन का एक बड़ा घोटाला पकड़ा था, जिसमें मिलरों और परिवहन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी।
चावल को गंतव्य तक पहुंचाने के बजाय बीच से गायब किया गया। इस फर्जीवाड़े में केवल ट्रांसपोर्टर ही नहीं, बल्कि एफसीआई से लेकर वेयरहाउस प्रबंधन, राइस मिलर और परिवहन एजेंसियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, लेकिन इस प्रकरण की जांच करने की बजाय इसे दबा दिया गया। बताया जाता है कि कुछ मामलों में तो पिछली बार की तरह कागजों पर परिवहन पूरा दिखाया गया, जबकि वास्तव में परिवहन हुआ ही नहीं।
चावल का परिवहन करने वाले ट्रकों में जीपीएस सिस्टम से लैस होना अनिवार्य है, लेकिन हकीकत यह रही कि यहां भी कई वाहनों में जीपीएस सिस्टम ही नहीं था।
एफसीआई, जबलपुर के डीएम सौरभ कुमार ने बताया कि एफसीआई की जिम्मेदारी सिर्फ परिसर तक की ही होती है। इसके बाद गेट से बाहर जाने वाले माल पर उनका कोई नियंत्रण नहीं होता। हालांकि, जबलपुर से जुड़ी ऐसी कोई शिकायत अभी तक हमारे पास नहीं आई है।

