बुलंद सोच, इंदौर।

मध्य प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तीन वर्ष पूरे होने के बाद अब इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव का व्यापक अध्ययन कराएगी। अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान (एआईजीजीपीए) को लगभग 1.25 करोड़ महिलाओं तक पहुंची इस योजना के आकलन का जिम्मा सौंपा गया है।
योजना का विवरण और उद्देश्य
यह अध्ययन महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता, घरेलू निर्णयों में भागीदारी और परिवार की जरूरतें पूरी करने की क्षमता में कितना बदलाव आया, इसका आकलन करेगा। सरकार यह जानना चाहती है कि लगातार मिल रही इस आर्थिक सहायता ने महिलाओं के जीवन में वास्तविक बदलाव कितना किया है। योजना मार्च 2023 में 1000 रुपये प्रतिमाह की सहायता राशि के साथ शुरू हुई थी। सितंबर 2023 से इसे बढ़ाकर 1250 रुपये किया गया और नवंबर 2025 से लाभार्थियों को 1500 रुपये प्रतिमाह मिल रहे हैं।
अध्ययन के मुख्य बिंदु
अध्ययन में यह देखा जाएगा कि राशि किन जरूरतों पर खर्च हो रही है, महिलाओं की आर्थिक स्थिति में कितना सुधार आया और स्वरोजगार के अवसर कितने बढ़े। इसके अतिरिक्त, कितनी पात्र महिलाएं अब भी योजना के लाभ से वंचित हैं, इसका भी आकलन किया जाएगा। योजना की राशि से अनेक महिलाएं अब दैनिक जरूरतों और बच्चों की शिक्षा-स्वास्थ्य के खर्च के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं हैं।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य और अन्य राज्यों का अध्ययन
हाल ही में ईएसी-पीएम द्वारा महाराष्ट्र की लाड़की बहीण और ओडिशा की सुभद्रा योजनाओं का देश का पहला वैज्ञानिक प्रभाव अध्ययन जारी किया गया। इस अध्ययन में यह पाया गया कि नकद सहायता से महिलाओं के बैंक खातों में बचत बढ़ी, खर्च और डिजिटल भुगतान बढ़ा तथा शिक्षा के साथ ही स्वास्थ्य पर खर्च में भी बढ़ोतरी हुई है। ईएसी-पीएम की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025-26 तक देश के 15 से अधिक राज्यों में महिलाओं के लिए प्रत्यक्ष नकद सहायता योजनाएं संचालित हो रही हैं। इन योजनाओं से लगभग 12 करोड़ महिलाएं जुड़ी हैं और राज्यों का कुल वार्षिक व्यय करीब 1.7 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि अब केवल नकद सहायता देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी मापना जरूरी है कि उससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति, आत्मनिर्भरता और जीवन स्तर में कितना सुधार हुआ।
लाड़ली बहना योजना के मुख्य तथ्य
लाड़ली बहना योजना की शुरुआत मार्च 2023 में हुई थी। वर्तमान में इसके तहत 1500 रुपये प्रतिमाह की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। वर्ष 2025-26 के लिए योजना का बजट 18,669 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। इस योजना की पात्रता 21 से 60 वर्ष की उन महिलाओं के लिए है जिनकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये तक है।

