BREAKING NEWS
2026-08-12

मप्र में एशियाई सिंहों को बसाने की योजना, गुजरात से आएगा नया जोड़ा

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

कूनो अभयारण्य में चीता प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अब प्रदेश के जंगलों में एशियाई सिंहों को बसाने और उनके प्रजनन के लिए प्राकृतिक परिस्थितियां बनाने (री-वाइल्डिंग) की कोशिश हो रही है।
कभी विंध्य, बुंदेलखंड और मध्य भारत के जंगलों में एशियाई सिंह बसते थे, लेकिन अंधाधुंध शिकार और जंगलों के तेजी से कटाव के कारण 19वीं शताब्दी के अंत तक वे लगभग समाप्त हो गए।
सिंहों की री-वाइल्डिंग के लिए वन विहार प्रबंधन इस साल नवंबर-दिसंबर में गुजरात से शुद्ध नस्ल के एशियाई सिंहों का जोड़ा लाने की तैयारी कर रहा है।
इनसे जन्म लेने वाले शावकों को चरणबद्ध तरीके से जंगल में बसाने की योजना है।

Advertisement

मौजूदा स्थिति और पूर्व के प्रयास

वर्तमान में वन विहार भोपाल में 5, ग्वालियर जू में 5 और इंदौर जू में 12 सिंह हैं।
वन विहार के डायरेक्टर विजय कुमार ने बताया कि अभी यहां जो 5 एशियाई सिंह हैं, इनके जीन पूल और संरक्षण संबंधी कारणों से ब्रीडिंग नहीं कराई जा सकती।
उन्होंने यह भी बताया कि ‘सत्या’ और ‘गंगा’ से प्रजनन का प्रयास किया गया था, पर वह सफल नहीं हो सके।
दिसंबर 2024 में जूनागढ़ से एक नया जोड़ा लाया गया था, लेकिन नर सिंह में कैनाइन डिस्टेंपर मिलने के बाद ब्रीडिंग रोकने के निर्देश दे दिए गए।

इंदौर चिड़ियाघर का योगदान

इंदौर चिड़ियाघर के प्रभारी उत्तम सिंह ने बताया कि वहां अभी 12 सिंह हैं।
बिलासपुर से आए जोड़े से 15 शावकों का जन्म हुआ था।
इसके बाद भिवानी (हरियाणा) से लाए गए सिंहों से 6 शावकों का जन्म हुआ।
कुल 21 सिंह दूसरे चिड़ियाघरों को भेजे गए।

संरक्षण प्राथमिकता

प्रधान मुख्य वन संरक्षक शुभ्रंजन सेन ने बताया कि एशियाई सिंहों के संरक्षण और री-वाइल्डिंग की योजना बनाई जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि शुद्ध आनुवंशिक गुणों वाले सिंहों से प्रजनन कर स्वस्थ पीढ़ी तैयार करना प्राथमिकता है।