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2026-10-17

मध्य प्रदेश में मिलावटी खाद्य पदार्थों पर कार्रवाई: 44,407 लीटर दूध जब्त, 73 नमूने अमानक और 25 असुरक्षित मिले

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

सावन में पूजा और घरों में उपयोग होने वाले दूध, घी से लेकर पनीर और मावे तक में मिलावट का बड़ा खेल सामने आया है। यह खुलासा खाद्य सुरक्षा विभाग के विशेष अभियान के दौरान हुआ है।
प्रदेशभर से लिए गए 2,605 लीगल नमूनों में से अब तक 680 की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है। इन रिपोर्टों में 73 नमूने अमानक (सबस्टैंडर्ड) और 25 नमूने असुरक्षित पाए गए हैं।

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घी में मिलावट: गंभीर स्वास्थ्य खतरा

जांच रिपोर्ट में घी की स्थिति सबसे अधिक चौंकाने वाली पाई गई है। गोवर्धन, द्वारकेश, शगुन, भूमि, दानेदार, धोलपुर फ्रेश, वास्तु और गोपीश्री सहित कई ब्रांड के घी के नमूने असुरक्षित मिले हैं।
रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि इन घी के नमूनों में पाम ऑयल, वेजिटेबल फैट सहित अन्य मिलावट पाई गई है। असुरक्षित घी का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है।
राजधानी भोपाल में चले अभियान में घी की स्थिति सर्वाधिक चिंताजनक सामने आई है, जहां 13 नमूने असुरक्षित पाए गए हैं। जांच में पाम ऑयल, वेजिटेबल फैट और सीसे जैसी मिलावट की जानकारी दी गई है।
बाजार में बिक रहे 25 से अधिक संदिग्ध घी ब्रांड भी वर्तमान में जांच के दायरे में हैं। अमानक पाए गए ब्रांडों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

जब्त सामग्री और नमूना संकलन

आयुक्त खाद्य सुरक्षा के निर्देश पर 20 जुलाई से 25 अगस्त तक चलाए गए विशेष अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा टीमों ने लगभग 44,407 लीटर दूध और दूध से बने उत्पाद जब्त किए।
प्रदेशभर में इस कार्रवाई के दौरान लगभग 11.73 लाख किलोग्राम खाद्य सामग्री जब्त की गई, जिसकी अनुमानित कीमत 5.61 करोड़ रुपये है।
विभाग ने 2,605 लीगल नमूनों के अतिरिक्त 2,037 सर्विलांस नमूने भी एकत्र किए। इस प्रकार, कुल 4,642 नमूनों की जांच प्रक्रिया शुरू की गई है।
अभियान के 25 दिनों के भीतर 849 दूध, 601 घी, 296 पनीर, 106 मावा और 382 अन्य दूध उत्पादों के नमूने लिए गए।

कार्रवाई और कानूनी प्रावधान

विभाग अब संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में पेश करेगा। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में जुर्माने के साथ छह महीने तक की सजा का प्रावधान है।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी शिवराज पावक के अनुसार, मिलावट पाए जाने पर 18 लाइसेंस-रजिस्ट्रेशन निरस्त किए गए हैं, जबकि धारा 32 के तहत 172 नोटिस जारी किए गए हैं।
अमानक मिले नमूनों के मामलों को जिला स्तर पर कलेक्टर कोर्ट में प्रस्तुत किया गया है, जबकि असुरक्षित घी के मामलों में सिविल कोर्ट में कार्रवाई की जा रही है।

उपभोक्ताओं के लिए दिशानिर्देश

मिलावट रोकने के लिए आम लोगों की सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। संदिग्ध खाद्य पदार्थ की सूचना मिलने पर उसकी जांच कराई जा सकती है।
उपभोक्ताओं को पैकेज्ड घी, पनीर या मिठाई पर एफएसएसएआइ लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन नंबर अवश्य देखना चाहिए और निर्माण, पैकिंग तथा एक्सपायरी तारीख की जांच करनी चाहिए।
यदि पैकेट फूला हुआ, फटा हुआ या उसकी सील टूटी हुई हो, तो ऐसे उत्पाद नहीं खरीदने चाहिए। मिठाई में असामान्य गंध, स्वाद, चिपचिपापन या फफूंद दिखने पर उसे नहीं लेना चाहिए।
संदिग्ध खाद्य पदार्थ खरीदने पर बिल अवश्य लेना चाहिए और पैकेट व लेबल की तस्वीर सुरक्षित रखनी चाहिए। केवल देखकर नकली और असली खाद्य पदार्थ की पक्की पहचान हमेशा संभव नहीं है।
दुकानों या प्रतिष्ठानों में गंदगी के बीच खाद्य सामग्री तैयार या परोसी जा रही हो, तो इसकी सूचना खाद्य सुरक्षा विभाग को देनी चाहिए।