बुलंद सोच।

अभिनेत्री नैना सरीन ने एक आईटी कंपनी की अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर एफटीआईआई में दाखिला लिया और फिर मुंबई आकर लगातार संघर्ष किया। उन्हें लगभग 60 ऑडिशन के बाद अपना पहला काम मिला, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। नैना सरीन वेब सीरीज ‘मेड इन हेवन’, ‘त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर’, ‘राख’ और ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ जैसी कई परियोजनाओं में नजर आ चुकी हैं। उन्होंने ‘दैनिक भास्कर’ के साथ बातचीत में अपने संघर्ष, ऑडिशन के अनुभव, उद्योग, परिवार और भविष्य की योजनाओं पर खुलकर बात की।
पारिवारिक सहयोग और प्रारंभिक जीवन
नैना सरीन बोकारो के एक मध्यमवर्गीय परिवार से आती हैं। उनके रिश्तेदारों को लगता था कि अभिनय केवल एक शौक है और कुछ सालों बाद वह वापस नौकरी पर लौट जाएंगी। हालांकि, उनके माता-पिता ने हमेशा उनका साथ दिया। उनकी माँ अक्सर कहती थीं, “जब सिर पर पड़ेगा, तब देख लेंगे।”

एफटीआईआई का सफर
नैना सरीन के पास सीधे मुंबई आने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। उन्हें कॉलेज के एक सीनियर से एफटीआईआई के बारे में जानकारी मिली। उस समय वह बेंगलुरु में एक आईटी कंपनी में इंस्ट्रक्शनल डिजाइनर के रूप में कार्यरत थीं। नौकरी के साथ-साथ वह वॉयस ओवर और मिमिक्री का भी प्रशिक्षण ले रही थीं। इसके बाद उन्होंने तैयारी करके एफटीआईआई का प्रवेश परीक्षा दोबारा दी और उनका चयन हो गया।
एफटीआईआई से मिले सबक
नैना सरीन के अनुसार, एफटीआईआई में केवल अभिनय नहीं सिखाया जाता, बल्कि स्वयं को समझना और अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करना भी सीखते हैं। वहाँ की कम्युनिटी को वह अपनी सबसे बड़ी ताकत मानती हैं। मुंबई आने के बाद भी उनके बैचमेट्स और सीनियर्स ने हमेशा उनका साथ दिया।
मुंबई में पहला काम और फिल्में
मुंबई आने के बाद नैना सरीन ने लगातार ऑडिशन दिए। लगभग 60 ऑडिशन के बाद उन्हें अपना पहला काम मिला, जिसका निर्देशन नीरज घेवान ने किया था। नीरज घेवान ने बाद में उन्हें ‘मेड इन हेवन’ में भी कास्ट किया। एफटीआईआई में पढ़ाई के दौरान ही उन्हें फिल्म ‘होटल मुंबई’ मिली, जिसमें उन्होंने ताज होटल की रिसेप्शनिस्ट का किरदार निभाया। इसके बाद फिल्म ‘ईब आले ऊ’ ने उन्हें काफी पहचान दिलाई और यह कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स में प्रदर्शित हुई।
वेब सीरीज और चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं
‘मेड इन हेवन’ के बाद उन्हें वेब सीरीज ‘त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर’ मिली। इस शो में शूटिंग का समय काफी लंबा था, जिसके कारण उन्हें कई अन्य प्रोजेक्ट्स छोड़ने पड़े। हालांकि, सेट का माहौल शानदार था और मानव कौल सहित पूरी टीम ने हर सीन में काफी मदद की। वेब सीरीज ‘राख’ में उनके केवल दो सीन थे, लेकिन उन्होंने यह भूमिका इसलिए चुनी क्योंकि किरदार छोटा होने के बावजूद बहुत प्रभावशाली था। ऑडिशन देते समय ही उन्हें समझ आ गया था कि यह आसान नहीं होगा। इसमें अंतरंगता वाले दृश्य भी थे, लेकिन सेट पर इंटिमेसी कोऑर्डिनेटर मौजूद थे, जिससे पूरा माहौल सुरक्षित और पेशेवर बना रहा।
सह-कलाकारों के साथ अनुभव
‘प्रीतम एंड पेड्रो’ में राजकुमार हिरानी और अरशद वारसी के साथ काम करने का उनका अनुभव अच्छा रहा। नैना सरीन ने बताया कि अरशद सर बेहद अनुशासित हैं और उनकी दिनचर्या सुनकर वह हैरान रह गईं। वहीं, राजकुमार हिरानी सर ने उनका सीन देखने के बाद पूछा कि क्या उन्होंने अभिनय की पढ़ाई की है। जब उन्हें पता चला कि नैना एफटीआईआई से हैं, तो उन्होंने संस्थान को लेकर काफी बातें कीं।
भूमिका चयन का दर्शन
नैना सरीन का कहना है कि वह लीड रोल करने के बाद भी छोटे किरदार करने में संकोच नहीं करतीं। उन्होंने खुद कास्टिंग डायरेक्टर्स से कहा है कि उन्हें हर तरह के रोल के लिए ऑडिशन के लिए बुलाएं। वह स्क्रीन टाइम नहीं देखतीं; उनके लिए अच्छा किरदार छोटा हो या बड़ा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
मुंबई में आर्थिक चुनौतियाँ
संघर्ष के दौरान मुंबई में सबसे बड़ी चुनौती पैसों की होती है। नैना सरीन हर नए कलाकार को सलाह देती हैं कि वे पहले अपनी कमाई का कोई जरिया तय करें। उनका कहना है कि वॉयस ओवर करें, असिस्टेंट बनें, राइटिंग करें या कोई दूसरी नौकरी करें, लेकिन आर्थिक रूप से टिके रहना बहुत जरूरी है।
सबसे चुनौतीपूर्ण किरदार
उनके लिए सबसे चुनौतीपूर्ण किरदार ‘त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर’ में एक माँ का था। माँ की जिम्मेदारी, उसकी बॉडी लैंग्वेज और भावनाओं को समझना आसान नहीं था। इस किरदार को निभाने के लिए उन्होंने अपनी माँ को बहुत करीब से ऑब्जर्व किया।
आगामी परियोजनाएं और व्यक्तिगत योजनाएं
नैना सरीन ने कुछ इंडिपेंडेंट फिल्मों की शूटिंग पूरी कर ली है। इसके अलावा, वह अपनी एफटीआईआई बैचमेट श्रेया भट्टाचार्य के साथ अपने निजी अनुभवों पर आधारित एक मिनी सीरीज लिख रही हैं। अभी वह उसके लिए प्रोड्यूसर की तलाश में हैं। निजी जिंदगी के बारे में उन्होंने बताया कि उनका ध्यान अभी सिर्फ फिल्मों में काम करने पर है। शादी सही समय और सही इंसान मिलने पर हो जाएगी। फिलहाल वह चाहती हैं कि उनके पास इतना काम हो कि बाकी चीजों के बारे में सोचने का समय ही न मिले।
मिमिक्री और वॉयस ओवर का अनुभव
नैना सरीन ने बेंगलुरु में मिमिक्री और वॉयस ओवर की ट्रेनिंग ली थी। उनका मानना है कि आवाज निकालना आसान है, लेकिन उसे लंबे समय तक उसी टोन में बनाए रखना सबसे मुश्किल काम होता है। पहले वह बच्चों की ई-लर्निंग किताबों की रिकॉर्डिंग भी किया करती थीं।

