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2026-08-14

नवाब हमीदुल्लाह खान ने सरदार पटेल को भारतीय संघ में विलय की सूचना दी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

आजादी के 11 दिन बाद नवाब हमीदुल्लाह खान ने सरदार पटेल को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने भारतीय संघ में शामिल होने के अपने निर्णय की सूचना दी। नवाब ने राज्यों के विभाग के मंत्री के रूप में सरदार पटेल को और उस डोमिनियन के प्रति अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट करने के उद्देश्य से यह पत्र लिखा, जिसमें भोपाल राज्य शामिल होने के लिए सहमत हो गया था।

नवाब हमीदुल्लाह खान ने 22 तारीख को हुई बातचीत का उल्लेख किया, जिसमें सरदार पटेल ने उनके विरोध पर आश्चर्य व्यक्त किया था। नवाब ने यह स्वीकार किया कि संघर्ष के दौरान उन्होंने अपनी रियासत की स्वतंत्रता और तटस्थता बनाए रखने के लिए अपनी शक्ति में मौजूद हर साधन का इस्तेमाल किया था।

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उन्होंने कहा कि अब जब उन्होंने अपनी हार स्वीकार कर ली है, तो उन्हें उम्मीद है कि सरदार पटेल उन्हें उतना ही पक्का दोस्त पाएंगे, जितना कि वह एक कट्टर विरोधी रहे थे। नवाब ने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी के प्रति कोई दुर्भावना नहीं है, क्योंकि उनके साथ पूरे समय सम्मानपूर्वक व्यवहार किया गया और उन्हें सरदार पटेल की ओर से समझदारी तथा शिष्टाचार मिला।

नवाब ने सरदार पटेल को आश्वासन दिया कि जब तक वह देश की विघटनकारी शक्तियों के खिलाफ अपना वर्तमान कड़ा रुख बनाए रखेंगे और राज्यों के मित्र बने रहेंगे, तब तक वह उन्हें एक वफादार और विश्वसनीय सहयोगी के रूप में पाएंगे।

उन्होंने कहा कि अब जब वह भारत संघ के साथ हैं, तो उनका प्रभाव हमेशा डोमिनियन सरकार के समर्थन में और जाति, पंथ या धर्म के भेदभाव के बिना देशद्रोही तत्वों का मुकाबला करने में इस्तेमाल होगा। नवाब ने सरदार पटेल के साथ खड़े रहने की बात कही और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने में सहायता की आवश्यकता पड़ने पर केवल एक शब्द कहने का आग्रह किया।

नवाब हमीदुल्लाह खान ने उम्मीद जताई कि अगली बार जब वह दिल्ली में होंगे, तो वे आगे बात कर सकते हैं।

सरदार पटेल का उत्तर

सरदार पटेल ने नवाब हमीदुल्लाह खान की रियासत के भारतीय राष्ट्र में विलय को न तो अपनी जीत और न ही उनकी हार माना। उन्होंने कहा कि अंततः विजय न्याय एवं उपयुक्तता की हुई है।

सरदार पटेल ने नवाब को स्थिति की महत्ता को समझने और ईमानदारी तथा साहस के साथ अपने पुराने रुख को बदलने के लिए श्रेय दिया।

उन्होंने नवाब के इस आश्वासन पर विशेष प्रसन्नता व्यक्त की कि वह देश के गद्दारों से निपटने में देश का साथ देंगे।

सरदार पटेल ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में उनके लिए यह बहुत निराशा और दुख की बात रही कि नवाब की असंदिग्ध योग्यता व प्रतिभा नाजुक समय में देश को उपलब्ध नहीं थी, इसलिए सहयोग व मैत्री का उनका वर्तमान आश्वासन और अधिक महत्त्वपूर्ण हो गया है।

स्रोत

नवाब के पत्र और सरदार पटेल के उत्तर का विस्तृत विवरण रफीक जकरिया की पुस्तक ‘सरदार पटेल और भारतीय मुसलमान’ में दिया गया है।