बुलंद सोच, भोपाल।
पश्चिम मध्य रेलवे प्रशासन ने वेस्ट सेंट्रल रेलवे एम्प्लाइज यूनियन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। इस यूनियन ने वर्ष 2014 में हुए मान्यता चुनाव में हार के बाद अपनी मान्यता खो दी थी। प्रशासन ने 1 अगस्त को यूनियन के कार्यालय को सील कर दिया।
इससे पहले, मान्यता के आधार पर यूनियन को मिली अधिकांश सुविधाएं पहले ही वापस ली जा चुकी थीं।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, दिसंबर 2014 में मान्यता चुनाव हारने के बाद भी यूनियन के पास कार्यालय बना हुआ था।
वहीं, पश्चिम मध्य रेल कर्मचारी परिषद और वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ लगातार यह मांग कर रहे थे कि मान्यता समाप्त होने के बाद यूनियन को मिली सभी सुविधाएं वापस ली जाएं।
इसके बाद प्रशासन ने पहले सीयूजी सिम, कार्ड पास और स्पेशल कैजुअल लीव जैसी सुविधाएं समाप्त कीं और अब कार्यालय भी सील कर दिया है।
कर्मचारी परिषद का दावा है कि यूनियन पर कार्यालय के किराए की एक करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि अभी भी बाकी है।
परिषद ने मांग की है कि यह राशि यूनियन के जिम्मेदार पदाधिकारियों के वेतन से प्रतिमाह वसूली जाए।
साथ ही, सेवानिवृत्ति के समय उनका अंतिम भुगतान (सेटलमेंट) रोककर बकाया राशि की समायोजन प्रक्रिया पूरी की जाए।
इस कार्रवाई के बाद पश्चिम मध्य रेलवे में कर्मचारी संगठनों के बीच एक बार फिर मान्यता और प्रशासनिक सुविधाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
बकाया राशि के लिए पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर दिया गया है। हर्षित श्रीवास्तव, सीपीआरओ, जबलपुर के अनुसार, अगर समय पर राशि जमा नहीं कराई गई तो मान्यता चुनाव लड़ने से भी अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
रेलवे पेंशनभोगियों के लिए राहत भरी खबर है कि अब विकल्प के अनुसार एचआरएमएस या मैनुअल पास मिलेंगे, जिससे डिजिटल बाध्यता खत्म हो जाएगी।

