बुलंद सोच, ग्वालियर।
ग्वालियर में वर्षा के मौसम में जगह-जगह जलभराव और साफ पानी के इकट्ठा होने से एडीज मच्छरों के पनपने की आशंका बढ़ गई है, जिससे डेंगू का खतरा मंडरा रहा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस वर्ष अब तक डेंगू की पॉजिटिविटी रेट पिछले साल की तुलना में कम है। वर्तमान में डेंगू की पॉजिटिविटी रेट 1.9 प्रतिशत है, जबकि पिछले वर्ष इसी दौरान यह 2.3 प्रतिशत थी। आंकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 2,139 जांचें की गई हैं, जिनमें 42 पॉजिटिव केस सामने आए हैं। वहीं, पिछले साल 9,676 जांचों में 203 मरीज मिले थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान डेंगू का जोखिम सबसे अधिक रहता है और अगस्त से सितंबर के बीच का समय सबसे ज्यादा संवेदनशील होता है। जुलाई महीने में फैला संक्रमण अगस्त के दौरान मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी कर सकता है। यदि अभी मच्छरों के प्रजनन स्रोतों को नष्ट नहीं किया गया, तो आगामी 30 से 45 दिनों में मरीजों की संख्या में उछाल आ सकता है।
मलेरिया विभाग का कहना है कि साफ पानी में पनपने वाले एडीज मच्छर का जीवनचक्र सात से 10 दिन का होता है। संक्रमित मच्छर के काटने के चार से 10 दिन बाद इसके लक्षण सामने आते हैं।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई
इस खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और मैदानी कार्रवाई तेज करने का दावा किया है। मलेरिया विभाग की 26 टीमें मैदान में सक्रिय हैं। अब तक विभाग द्वारा 2 लाख 31 हजार 957 घरों का सर्वे किया जा चुका है। सर्वे के दौरान 2 हजार 882 घरों में मच्छर का लार्वा मिला है।
संवेदनशील वार्ड और बचाव के उपाय
डेंगू संक्रमण के लिहाज से शहर के कुछ इलाके अत्यधिक संवेदनशील बने हुए हैं। इनमें मुख्य रूप से वार्ड तीन, पांच, 18, 19, 28, 52, 56 और 60 शामिल हैं। जिन इलाकों में पॉजिटिव मरीज मिल रहे हैं, वहां विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाए जाने का दावा किया जा रहा है।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉक्टर विनोद दौनेरिया ने आमजन से अपील की है कि वे घरों और आसपास पानी बिल्कुल जमा न होने दें, कूलर, पानी की टंकियों और गमलों की नियमित रूप से सफाई करें, मच्छरों से बचाव के लिए पूरी बाजू के कपड़े पहनें और शरीर में हल्का सा भी बुखार महसूस होते ही तुरंत अपनी जांच करवाएं। उन्होंने यह भी बताया कि जिन इलाकों में मरीज मिल रहे हैं, वहां विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

