बुलंद सोच, राजगढ़।

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में सोमवार को पड़ाना बायपास पर एक नाले के उफनाए पुल से एक कार बह गई। इस दुर्घटना में देवास जिले के धंसाड़ निवासी एक ही परिवार के 11 लोग कड़लावद के लिए जा रहे थे। नाले का पानी सड़क पर होने के कारण चालक ने वाहन पर नियंत्रण खो दिया, जिसके परिणामस्वरूप कार नाले में समा गई। हादसे में दो लोगों को ही बचाया जा सका, जबकि चार बच्चों सहित नौ लोगों की डूबने से मृत्यु हो गई।
प्रशासनिक लापरवाही के आरोप
जिस समय कार ने नाले को पार करने का प्रयास किया, उससे कई घंटे पहले ही पुल पर पानी चढ़ चुका था। इस दौरान प्रशासन द्वारा न तो बैरिकेड लगाए गए और न ही यातायात रोकने के लिए किसी को वहां तैनात किया गया। जिस नाले में कार बही, उस पर रैलिंग तक नहीं थी। ग्रामीणों ने घटना के बाद आरोप लगाया कि यदि बाढ़ आते ही पुल पर पुलिस तैनात होती तो यह हादसा रोका जा सकता था। जिला पंचायत अध्यक्ष, राजगढ़, चंदरसिंह सौंधिया ने कहा कि पुलिया पर न तो रैलिंग थी, न संकेतक और न ही बैरिकेड लगाए गए। उन्होंने हर स्तर पर लापरवाही बरते जाने का आरोप लगाते हुए जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की और ऐसा न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
जांच में लीपापोती का आरोप
दुर्घटना के ठीक अगले दिन मंगलवार को जिला प्रशासन पर इस घटना को भूल जाने का आरोप लगा। इतनी बड़ी दुर्घटना के बाद भी इसकी जांच कराने या जिम्मेदारी तय करने की कोई कोशिश नहीं की गई। हादसे के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क उठा था और शव निकालने के दौरान उन्होंने पुलिस-प्रशासन हाय-हाय के नारे लगाए। इस मामले में पुलिस अधीक्षक अमित कुमार तोलानी ने कोई प्रतिक्रिया देना उचित नहीं समझा।
प्रशासन की ओर से कार्रवाई
राजगढ़ कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने बताया कि पुल का निर्माण करने वाली एजेंसी को एक नोटिस भेजने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि दोनों पुलिया के बीच क्रैश वाल बनाने के निर्देश दिए गए हैं। शेष कार्रवाई पुलिस रिपोर्ट के बाद की जाएगी।

