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2026-07-23

आरएसएस शताब्दी वर्ष: भोपाल में ‘युग प्रवर्तक डॉ. हेडगेवार’ महानाट्य का मंचन, सीएम मोहन यादव मुख्य अतिथि

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मंगलवार को संस्कार भारती द्वारा भोपाल के रवींद्र भवन में महानाट्य ‘युग प्रवर्तक डॉ. हेडगेवार’ का मंचन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित होने पर बधाई दी गई। नागपुर की नादब्रह्म संस्था द्वारा प्रस्तुत इस महानाट्य का निर्देशन सुबोध सुरजीकर ने किया है, जबकि इसकी रचना डॉ. अजय प्रधान ने की है। मुख्यमंत्री ने कलाकारों के अभिनय की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संबोधन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने देशभक्ति के साथ समाज में समानता और राष्ट्र सर्वोपरि का विचार दिया था, जिसे आज पूरा देश समझ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. हेडगेवार ने स्वतंत्रता से पहले ही राष्ट्र निर्माण की चुनौतियों को समझ लिया था और समाज को संगठित करने के लिए रचनात्मक कार्य शुरू किए। डॉ. यादव के अनुसार, आज समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की पहल भी समानता के इसी भाव को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने जिस भारत के भविष्य की कल्पना की थी, वह आज साकार होती दिखाई दे रही है। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश राष्ट्रहित और समानता के मूल्यों को आगे बढ़ा रहा है तथा भारत अपनी सांस्कृतिक पहचान और गौरव को पुनः स्थापित कर रहा है।

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अन्य गणमान्य व्यक्ति और पदाधिकारी के विचार

इस अवसर पर पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, वरिष्ठ पदाधिकारी अशोक पांडे, अभिनेता एवं रंगकर्मी राजीव वर्मा और संस्कृति संचालक एन.पी. नामदेव सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारी हेमंत मुक्तिबोध ने कहा कि डॉ. हेडगेवार का पूरा जीवन राष्ट्रसेवा और समर्पण का उदाहरण है। हेमंत मुक्तिबोध ने बताया कि यह नाटक डॉ. हेडगेवार के व्यक्तित्व, विचारों और राष्ट्र निर्माण में योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम है।