बुलंद सोच, लक्षद्वीप।
लक्षद्वीप की एक अदालत ने नाबालिग लड़के के साथ यौन अपराध करने के दोषी 37 वर्षीय व्यक्ति को कड़ी सजा सुनाई है। अदालत ने पॉक्सो अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत कुल 40 साल के कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी, इसलिए दोषी को 20 साल की वास्तविक कैद काटनी होगी। अदालत ने दोषी पर 1.20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
अदालत ने कहा कि घटना के समय पीड़ित की उम्र 12 वर्ष से कम थी। दोषी और बच्चे के बीच रिश्ते का भरोसा था, जिसका गलत फायदा उठाया गया।
अदालत ने यह भी माना कि यह एक बार की घटना नहीं थी, बल्कि बार-बार अपराध किया गया। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने सजा में किसी भी तरह की नरमी देने से इनकार कर दिया।
अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई से ही लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बना रहेगा।
फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि बच्चों के खिलाफ अपराध अब लक्षद्वीप जैसे छोटे केंद्र शासित प्रदेश में भी गंभीर चिंता का विषय बन चुके हैं। अदालत ने कहा कि यहां समाज आपस में काफी जुड़ा हुआ है और इसी वजह से कई बार बच्चे अपने परिचित लोगों के हाथों शोषण का शिकार हो जाते हैं।
अदालत ने कहा कि न्यायालय की जिम्मेदारी केवल पीड़ित को न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में यह भरोसा भी कायम रखना है कि बच्चों के शोषण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
अभियोजन के अनुसार, घटना के बाद बच्चा पढ़ाई में कमजोर होने लगा और कक्षा में उसका ध्यान नहीं लग रहा था। इसके बाद माता-पिता उसे मनोचिकित्सक के पास लेकर गए। काउंसलिंग के दौरान बच्चे ने अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी, जिसके बाद मामला सामने आया।
अदालत ने दोषी पर लगाए गए 1.20 लाख रुपये के जुर्माने में से 1 लाख रुपये पीड़ित को देने का आदेश दिया। इसके अलावा, पीड़ित की कम उम्र, उसके साथ हुए बार-बार के शोषण और मानसिक आघात को देखते हुए पीड़ित मुआवजा योजना के तहत 2 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा देने की भी सिफारिश की।
