बुलंद सोच,।
सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव के कारण संसद के मानसून सत्र का कामकाज प्रभावित हुआ है। सत्र की अब तक हुई 15 बैठकों में दोनों सदनों की कार्यवाही कुल 88 बार स्थगित हो चुकी है। इनमें से राज्यसभा 46 बार और लोकसभा 42 बार स्थगित हुई।
सामान्य तौर पर दोनों सदनों में प्रतिदिन 7 से 8 घंटे कामकाज की उम्मीद की जाती है, लेकिन इस सत्र में औसतन लगभग एक-एक घंटे ही काम हो सका है। इससे संसद के कामकाज और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
इन 15 बैठकों के दौरान लोकसभा में एक बार भी प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हो पाया। प्रश्नकाल में सांसद सरकार से सीधे सवाल पूछते हैं, जबकि शून्यकाल में जरूरी और तत्काल सार्वजनिक मुद्दे उठाए जाते हैं।
दोनों सदनों में कुल 10 विधेयक पारित हुए हैं। हालांकि, हंगामे के कारण विपक्ष की ओर से लाए गए स्थगन प्रस्तावों पर चर्चा नहीं हो सकी। इसका अर्थ है कि सदन में कानून बनाने का काम तो हुआ, लेकिन कई मुद्दों पर बहस का अवसर नहीं मिल सका। इससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संसदीय कामकाज को लेकर आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं।
नीट पेपर लीक: प्रमुख टकराव का कारण
नीट पेपर लीक का मुद्दा इस सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का एक बड़ा कारण रहा है। दोनों सदनों में इस मामले पर लगभग 20 घंटे चर्चा हुई।
हालांकि, आरोप है कि चर्चा के दौरान गिने-चुने सांसदों को छोड़कर ज्यादातर समय सियासी आरोप-प्रत्यारोप में ही बीत गया।
सरकार और विपक्ष के आरोप-प्रत्यारोप
सरकार का आरोप है कि विपक्ष सदन में चर्चा के बजाय लगातार हंगामा कर रहा है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया कि विपक्ष बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) की बैठक में विधेयकों पर सहमति देता है, लेकिन सदन में हंगामा करता है।
वहीं, दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि सरकार जरूरी मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ सांसद धर्मेंद्र यादव ने सरकार को टकराव के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने नीट पेपर लीक आंदोलन के दौरान हुई ज्यादतियों पर जवाब की मांग की है।
विपक्ष का सवाल है कि जब किसी मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा जा रहा है, तो उसे सदन में रखने का मौका क्यों नहीं दिया जा रहा है। इस प्रकार, दोनों पक्षों के बीच आरोपों का सिलसिला जारी है।

