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2026-08-08

सीहोर के सेठ द्वारा प्रथम विश्वयुद्ध में दिए कर्ज पर ब्रिटेन ने मांगे दस्तावेज

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, सीहोर।

मध्य प्रदेश के सीहोर के सेठ जुम्मा लाल रुठिया ने प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान वर्ष 1917 में ब्रिटिश हुकूमत द्वारा कर्ज मांगे जाने पर 35 हजार रुपये दिए थे। अब सेठ रुठिया के उत्तराधिकारियों ने ब्रिटेन सरकार से इस कर्ज का भुगतान करने के लिए पत्राचार किया है। इस पर यूनाइटेड किंगडम सरकार की एजेंसी यूके डेट मैनेजमेंट ऑफिस ने उत्तराधिकारियों से कर्ज देने से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं।

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प्रमाण-पत्र की खोज

परिवार के विनय रुठिया और उनके छोटे भाई विवेक रुठिया ने बताया कि पुश्तैनी कागजातों की छानबीन के दौरान उन्हें चार जून 1917 का एक ऐतिहासिक प्रमाण-पत्र मिला है। भोपाल रियासत के तत्कालीन पॉलिटिकल एजेंट डब्ल्यूएस डेविस द्वारा जारी इस प्रमाण-पत्र के अनुसार, सेठ जुम्मा लाल रुठिया फर्म के रामकिशन जसकरण रुठिया ने ब्रिटिश हुकूमत को 35 हजार रुपये ‘वार लोन’ के रूप में दिए थे। यह रकम देने के 20 साल बाद वर्ष 1937 में सेठ जुम्मा लाल का निधन हो गया था, लेकिन इस कर्ज का भुगतान आज तक नहीं हुआ है।

कानूनी प्रक्रिया की शुरुआत

विवेक रुठिया ने अपने अधिवक्ता श्रेयांस रानीवाला के माध्यम से इसी वर्ष फरवरी माह में यूके डेट मैनेजमेंट ऑफिस को लीगल नोटिस भेजा था। वर्ष 1917 की 35 हजार रुपये की यह राशि आज के हिसाब से कई करोड़ रुपये होती है। तीन अगस्त को यूके डेट मैनेजमेंट ऑफिस से अधिवक्ता को प्राप्त ई-मेल में कहा गया है कि यदि दावेदार को किसी अप्राप्त भुगतान का अधिकार है, तो वह गिल्ट रजिस्ट्रार से संपर्क करे। ब्रिटेन सरकार के लोन विभाग ने परिवार से मूल प्रमाण-पत्र व पत्राचार की प्रतियां उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि दावे की वैधानिक प्रक्रिया पूरी की जा सके।

परिवार की आगे की रणनीति

रुठिया परिवार का यह भी कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत एक संप्रभु देश अपने पुराने कर्ज को चुकाने के लिए बाध्य होता है। परिवार का कहना है कि वे जल्द ही ब्रिटिश कार्यालय को सभी आवश्यक दस्तावेज सौंपेंगे। साथ ही, वे भारत सरकार से भी इस पुराने युद्ध ऋण की स्थिति स्पष्ट करने की मांग करेंगे।