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2026-07-29

सेमाग्लूटाइड इंजेक्शन का दुरुपयोग खतरनाक: कीमत घटने के बाद वजन घटाने के लिए बढ़ा चलन

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मधुमेह और मोटापे के इलाज में इस्तेमाल होने वाले सेमाग्लूटाइड आधारित इंजेक्शनों की कीमत में कमी आने के बाद लोगों ने बिना डॉक्टरी सलाह इसका इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इससे वजन तो कम हुआ, लेकिन कमजोरी, डिहाइड्रेशन, मतली और उल्टी, पित्ताशय में पथरी जैसी तमाम परेशानियां शुरू हो गईं।

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दरअसल, मार्च 2026 में सेमाग्लूटाइड का पेटेंट खत्म होने के बाद इसके सस्ते जेनेरिक बाजार में आने लगे हैं। पहले इसका प्री-फिल्ड पेन 20 हजार रुपए का आता था, जो अब 1500 रुपए में उपलब्ध है।

लिहाजा, कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के यह इंजेक्शन लगवा रहे हैं।

एमपी फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रवक्ता राजवीर त्यागी बताते हैं कि पहले जहां हर महीने करीब 4 हजार इंजेक्शन की मांग थी, वही संख्या अब बढ़कर 19 हजार प्रति माह हो गई है।

विशेषज्ञों की राय

एंडोक्रोनोलॉजिस्ट डॉ. मनुज शर्मा का कहना है कि मधुमेह के इलाज के लिए यह एक जादुई दवा है, लेकिन बिना चिकित्सकीय सलाह इसके इस्तेमाल के गंभीर जोखिम हैं। उन्होंने बताया कि सामान्य वजन वाले लोग भी केवल पतला दिखने के लिए यह दवा मांग रहे हैं, जो खतरनाक है। इसकी खुराक भी चिकित्सकीय सलाह से धीरे-धीरे तय की जाती है।

विशेषज्ञों ने कहा कि बिना चिकित्सीय निगरानी इसका इस्तेमाल घातक हो सकता है।

सामने आए मामले

एक 27 वर्षीय युवती ने शादी से पहले जल्दी वजन कम करने के लिए इंजेक्शन लेना शुरू किया। कुछ सप्ताह बाद तेज पेट दर्द, उल्टी और डिहाइड्रेशन के कारण उसे अस्पताल पहुंचना पड़ा। जांच में पित्ताशय में पथरी और शरीर में पानी की गंभीर कमी मिली। उपचार के बाद उसकी स्थिति सामान्य हुई।

भोपाल की एक 34 वर्षीय महिला ने सोशल मीडिया से प्रेरित होकर बिना विशेषज्ञ की सलाह के इंजेक्शन शुरू किया। तीन महीने में उसका 14 किलो वजन कम हो गया, लेकिन कमजोरी और उल्टी की शिकायत होने लगी। जांच के बाद डॉक्टरों ने इंजेक्शन बंद कराया और उपचार शुरू किया।

इस संबंध में सीनियर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. प्रणव रघुवंशी ने भी अपनी राय दी है।