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2026-07-29

मुरैना के कैलारस शक्कर कारखाने की 438 करोड़ की जमीन 60 करोड़ में बिकी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, मुरैना।

मुरैना के कैलारस स्थित शक्कर कारखाने को दोबारा शुरू करने के बजाय, अधिकारियों ने इसे ठिकाने लगाने का निर्णय लिया। जिस कारखाने की 37.887 हेक्टेयर निजी जमीन का मूल्यांकन स्वयं जिला पंजीयक और कलेक्टर ने 438.14 करोड़ रुपए तय किया था, उसे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग (MSME) को केवल 60.92 करोड़ रुपए में बेच दिया गया।

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पुनर्जीवन की अनदेखी

विशेषज्ञों और किसान संघ के प्रस्ताव के अनुसार, यदि कारखाने को पुनर्जीवित किया जाता, तो नेशनल कॉपरेटिव डेवलेपमेंट कॉर्पोरेशन (एनसीडीसी) की नीति के तहत 5 हजार करोड़ का ऋण मिल सकता था। इससे मुरैना और आसपास के जिलों में 20 नए शक्कर कारखाने खुल सकते थे, जिससे 30 हजार युवाओं को रोजगार के अवसर मिलते और 1 लाख किसानों की आय दोगुनी हो सकती थी। हालांकि, अधिकारियों ने राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ (दिल्ली), बसंत दादा शक्कर इंस्टीट्यूट (पुणे) और राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय (ग्वालियर) जैसी विशेषज्ञ संस्थाओं की सिफारिशों को पूरी तरह से अनदेखा कर दिया। मुरैना कलेक्टर के 20 मई 2025 के पत्र के अनुसार, जिला पंजीयक ने कैलारस शक्कर कारखाने की 37.887 हेक्टेयर जमीन का मूल्य ₹438.14 करोड़ तय किया था। विशेषज्ञों और किसान संघ ने प्रस्ताव दिया था कि इस 438 करोड़ की संपत्ति को मार्जिन मनी मानकर एनसीडीसी की नीति के तहत ₹5,000 करोड़ का ऋण लिया जा सकता था, जिससे कैलारस कारखाने के साथ 20 नई इकाइयां भी शुरू की जा सकती थीं।

स्वामित्व पर विवाद

अधिकारियों का तर्क है कि यह शासन की जमीन थी जिसे वापस लिया गया है। लेकिन दस्तावेजों की पड़ताल से पता चलता है कि 9 जनवरी को चेक (क्र. 005140114221) के माध्यम से कारखाने की निजी स्वामित्व वाली जमीन को महज 60.92 करोड़ रुपए में खरीदा गया और अगले ही दिन 10 जनवरी को सरकारी लीज वाली 22.340 हेक्टेयर जमीन की लीज निरस्त कर दी गई।

अधिकारियों के बयान

सहकारिता उपायुक्त व परिसमापक अनुभा सूद ने कहा कि वैल्यूएशन 438 करोड़ से 60 करोड़ रुपए कैसे हुआ, यह सब शासन स्तर से तय हुआ है और सारी जानकारी कलेक्टर के माध्यम से शासन को भेजी जा रही है। कैलारस शक्कर कारखाना के पूर्व सीजीएम एमडी पाराशर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कारखाने को पुनर्जीवित करने की घोषणा की थी, लेकिन 438 करोड़ की जमीन को 60 करोड़ में बेच दिया गया, यह फैसला समझ से परे है। कैलारस शक्कर कारखाना के महाप्रबंधक भास्कर शर्मा ने बताया कि जमीन बेचने की गलत व्याख्या की जा रही है, वह शासन की जमीन थी और बाकी कुछ हिडन चीजें हैं जो बताई नहीं जा सकतीं। जिला व्यापार उद्योग केंद्र, मुरैना के जीएम अरविंद महेश्वरी ने कहा कि कैलारस कारखाने की जमीन MSME को हस्तांतरित कर दी गई है और अब इस जमीन पर नया इंडस्ट्रियल एरिया विकसित किया जाएगा।

कारखाने का इतिहास

दि मुरैना मंडल सहकारी शक्कर कारखाना मर्यादित कैलारस का पंजीयन 23 अक्टूबर 1965 को हुआ था और 1971-72 में इसमें उत्पादन शुरू हुआ। यह कारखाना प्रतिदिन 1250 मीट्रिक टन गन्ने की पिराई से 1250 क्विंटल शक्कर बनाता था, लेकिन घाटे का हवाला देकर इसे 2009 में बंद कर दिया गया। 10 अक्टूबर 2019 को सहकारिता आयुक्त ने इसके परिसमापन का आदेश जारी कर मुरैना सहकारिता उपायुक्त को परिसमापक नियुक्त किया।

उठाए गए प्रश्न

विशेषज्ञों ने प्रश्न उठाए हैं कि ₹438 करोड़ की संपत्ति को मार्जिन मनी बनाकर ₹5,000 करोड़ के ऋण का विकल्प क्यों छोड़ा गया और परिसमापक ने संपत्ति को अधिकतम मूल्य पर बेचने तथा अंशधारियों की आमसभा बुलाने के नियमों का उल्लंघन क्यों किया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि धारा 69(4) के तहत संस्था को पुनर्जीवित करने के बजाय जमीन को MSME के जरिए निजी उद्यमियों को दिए जाने का रास्ता क्यों खोला गया। मुख्यमंत्री की घोषणा के 24 दिन बाद भी यह फैसला एजेंडा से गायब रहा।