बुलंद सोच, भोपाल।
त्योहारी सीजन के ठीक पहले खाद्य पदार्थों के दाम अचानक बढ़ गए हैं। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है, जिससे भोजन की थाली का खर्च बढ़ गया है। त्योहारी सीजन में मिठाइयाँ भी महंगी हो सकती हैं। शक्कर, तुवर (अरहर) और चने की दाल के बढ़ते दाम का असर अब हर घर की रसोई पर दिखाई देने लगा है। चावल, सोयाबीन तेल, बेसन एवं मैदा आदि के दाम भी बढ़े हैं, जिससे चाय, दाल, मिठाइयों और नाश्ते की कई चीजों की लागत बढ़ गई है। व्यापारियों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले त्योहारों में मिठाइयों के दाम भी बढ़ सकते हैं, जिससे आम लोगों का मासिक बजट प्रभावित हो रहा है।
शक्कर की कीमतों में उछाल और कारण
पिछले एक माह में शक्कर के दाम 25 प्रतिशत तक बढ़े हैं। जानकारों के अनुसार शक्कर की कीमतें बढ़ने की कई वजहें हैं, जिनमें पिछले साल की तुलना में बाजार में उपलब्ध स्टॉक का कम होना और मांग का लगातार बना रहना प्रमुख है। इसके अलावा, सरकार की इथेनॉल नीति के तहत गन्ने का एक हिस्सा इथेनॉल बनाने में भी उपयोग हो रहा है। हालांकि, केवल इथेनॉल की वजह से ही शक्कर महंगी नहीं हुई है; कम स्टॉक, बढ़ती मांग और आपूर्ति पर दबाव भी कीमतें बढ़ने के प्रमुख कारण हैं। त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए व्यापारियों पर चीनी के स्टॉक की सीमा भी तय की है, ताकि बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके।
दालों ने बढ़ाया रसोई का खर्च
कुछ दिनों में तुवर दाल के साथ-साथ चने की दाल के दाम में भी बढ़ोतरी हुई है। दालों के उत्पादन और आपूर्ति में उतार-चढ़ाव के कारण इनके भाव ऊंचे बने हुए हैं। तुवर दाल जहां रोजाना के भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, वहीं चने की दाल का उपयोग दाल के अलावा बेसन, नमकीन, लड्डू, मिठाइयों और कई अन्य खाद्य पदार्थों में होता है। ऐसे में चने की दाल महंगी होने से इन उत्पादों की लागत भी बढ़ रही है। मिठाई कारोबारियों का कहना है कि शक्कर और चने की दाल दोनों महंगी होने से बेसन के लड्डू, मोतीचूर लड्डू, मैसूर पाक, बर्फी और अन्य मिठाइयों की लागत बढ़ गई है। यदि कच्चे माल के दाम कम नहीं हुए तो रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान मिठाइयों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
विशेषज्ञों की राय और बाजार भाव
भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू ने कहा कि शक्कर की उपलब्धता कम होने और इथेनॉल नीति से भाव पर असर पड़ रहा है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि चावल, आटा और मैदा जैसे रोजमर्रा के प्रमुख सफेद खाद्य पदार्थों के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं, जिसका सीधा असर आम आदमी की रसोई और घरेलू बजट पर पड़ रहा है। साहू ने सुझाव दिया कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों और उपलब्धता की स्थिति पर गंभीरता से निगरानी रखी जानी चाहिए, ताकि बढ़ती खाद्य महंगाई का बोझ आम उपभोक्ताओं पर कम किया जा सके।
फुटकर किराना व्यापारी रवि टेकवानी ने बताया कि शक्कर के दाम लगातार बढ़ रहे हैं और थोक बाजार में रोज बढ़ोतरी होने से फुटकर व्यापारी परेशान हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पर भी महंगाई का बोझ बढ़ गया है। टेकवानी के अनुसार, तुवर दाल, चना दाल एवं बेसन हर घर के उपयोग की वस्तु है और इनके दाम अचानक बढ़ने से रसोई का खर्च बढ़ गया है, जिससे कारोबार भी कम हो गया है।
किराना व्यापारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, भोपाल में विभिन्न जिंसों के थोक और फुटकर भाव प्रति किलो इस प्रकार हैं:
* **जिंस:** शक्कर
* **थोक भाव:** 51 से 51 रु
* **फुटकर भाव:** 54 से 55 रु
* **जिंस:** अरहर दाल
* **थोक भाव:** 110 से 115 रु
* **फुटकर भाव:** 120 से 130 रु
* **जिंस:** चना दाल
* **थोक भाव:** 72 से 75 रु
* **फुटकर भाव:** 80 से 85 रु
* **जिंस:** मैदा
* **थोक भाव:** 38 से 40 रु
* **फुटकर भाव:** 42 से 46 रु

