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पुलिस प्रताड़ना के आरोपों से घिरी सावित्री बाई चौधरी का गर्भपात, परिवार की खुशी मातम में बदली

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, बालाघाट।

बालाघाट के किरनापुर थाना क्षेत्र का बहुचर्चित मामला और अधिक गरमा गया है। चोरी के झूठे मामले में पकड़ी गई सावित्री बाई चौधरी और उनके पति कैलाश चौधरी के साथ पुलिस द्वारा कथित अमानवीय व्यवहार और मारपीट के आरोपों के बीच अब पीड़िता महिला का गर्भपात हो गया है।

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मारपीट के बाद घायल महिला खाट पर लेटकर शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंची थी। इसके बाद उन्हें 7 सितंबर को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के बाद 17 सितंबर को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।

हालांकि, छुट्टी के कुछ दिन बाद ही महिला के पेट में दोबारा तेज दर्द शुरू हो गया। परिजन उन्हें 22 सितंबर की शाम फिर से जिला अस्पताल लेकर आए और भर्ती कराया। रात में सोनोग्राफी की गई, लेकिन रिपोर्ट स्पष्ट नहीं आने पर 23 सितंबर की सुबह महिला चिकित्सक ने दोबारा सोनोग्राफी की।

डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि महिला को लगातार रक्तस्राव हो रहा है और गर्भ में पल रहे नवजात की धड़कन नहीं मिल रही है। डॉक्टरों ने गर्भपात कराने की बात कही है।

हालांकि, महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा मात्र 9 ग्राम होने और खून की कमी के चलते फिलहाल ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है।

पीड़िता के पति कैलाश चौधरी ने जानकारी दी कि उनकी शादी 2020 में हुई थी और शादी के 6 साल बाद तक कोई संतान नहीं थी। काफी इंतजार के बाद उनकी पत्नी करीब दो माह की गर्भवती हुई थीं, जिससे परिवार में खुशी का माहौल था।

कैलाश चौधरी ने आरोप लगाया कि गर्भपात के बाद यह खुशी मातम में बदल गई है और इसका एकमात्र कारण पुलिस द्वारा लगाए गए झूठे आरोप, मारपीट तथा अमानवीय व्यवहार है। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रताड़ना के बाद से ही उनकी पत्नी शारीरिक और मानसिक रूप से टूट गई थीं और उबर नहीं पाईं।

कैलाश के अनुसार, दर्द निवारक दवाइयों और तनाव के बीच गर्भ पर बुरा असर पड़ा।

इस पूरे मामले में अब तक खामोश चल रहे मरार समाज के प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व जिला मंत्री एवं भाजपा जिलाध्यक्ष रामकिशोर कावरे भी इस नई घटना के बाद सक्रिय हो गए हैं। बुधवार को वे समाज के पदाधिकारियों के साथ जिला अस्पताल पहुंचे और पीड़िता महिला व उनके परिजनों से मुलाकात की।

मीडिया से बात करते हुए कावरे ने कहा कि यह मामला अब और भी गंभीर हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला के साथ मारपीट के बाद उपचार के दौरान केवल दर्द निवारक दवाइयां देकर खानापूर्ति की गई।

कावरे ने कहा कि शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना से महिला उबर नहीं पाईं, जिसके कारण यह हृदय विदारक घटना घटी है।

उन्होंने यह भी कहा कि अब यह लड़ाई प्रदेश स्तर पर लड़ी जाएगी। मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की जाएगी कि इस मामले में भ्रूण हत्या का अपराध दर्ज किया जाए और दोषी पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई हो।

समाज के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो जिला से लेकर प्रदेश स्तर तक बड़ा आंदोलन किया जाएगा। वहीं, जिला अस्पताल में भर्ती महिला के स्वास्थ्य को लेकर परिजन चिंतित हैं और प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहे हैं।